आज की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली के कारण शरीर में आयरन की कमी एक आम समस्या बन गई है। आयरन की कमी से थकान, कमजोरी, एनीमिया और हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में सही खानपान अपनाकर इस कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
आयरन क्यों है शरीर के लिए जरूरी?
आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाने का काम करता है। आयरन की कमी होने पर शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे लगातार थकान, चक्कर आना, कमजोरी, सिरदर्द और त्वचा का पीला पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
1. हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन का अच्छा स्रोत हैं। इनमें फोलेट और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं। बेहतर अवशोषण के लिए इन्हें विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाना फायदेमंद हो सकता है।
2. चुकंदर और अनार
चुकंदर में आयरन के साथ पोटैशियम और फाइबर भी होता है, जबकि अनार कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इनका सेवन शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकता है।
3. दालें, बीन्स और सोयाबीन
राजमा, चना, मसूर, लोबिया और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ शाकाहारी लोगों के लिए आयरन और प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। अंकुरित दालों का सेवन भी पोषण बढ़ाने का अच्छा विकल्प माना जाता है। टोफू भी प्लांट-बेस्ड डाइट लेने वालों के लिए उपयोगी विकल्प है।
4. ड्राई फ्रूट्स, बीज और गुड़
किशमिश, खजूर, अंजीर, बादाम, कद्दू के बीज, तिल और सीमित मात्रा में गुड़ का सेवन आयरन युक्त संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है। इन्हें स्नैक्स के रूप में भी शामिल किया जा सकता है।
आयरन बढ़ाने के लिए रखें ये बातें याद
आयरन युक्त भोजन के साथ नींबू, आंवला या अन्य विटामिन-सी वाले खाद्य पदार्थ लेने से आयरन के अवशोषण में मदद मिल सकती है। वहीं भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से बचें, क्योंकि इससे आयरन के अवशोषण पर असर पड़ सकता है। यदि लगातार कमजोरी, एनीमिया या हीमोग्लोबिन कम रहने की समस्या हो, तो डॉक्टर से जांच और सलाह जरूर लें।
संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाकर शरीर में आयरन की कमी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि यदि आयरन की कमी गंभीर हो या एनीमिया की पुष्टि हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार और सप्लीमेंट लेना जरूरी है।
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