जून और जुलाई की तेज गर्मी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि पाचन तंत्र को भी प्रभावित करती है। इस मौसम में कई लोग गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेट फूलना, मतली और भूख कम लगने जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। अक्सर लोग इन समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसके पीछे पाचन अग्नि का कमजोर होना एक प्रमुख कारण है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन और अनियमित जीवनशैली पाचन क्षमता को प्रभावित कर देती है।
गर्मी में पाचन क्रिया क्यों हो जाती है कमजोर?
आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों के मौसम में शरीर की पाचन अग्नि स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है। लगातार पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी होने लगती है। इसके साथ ही नींद की कमी, तनाव और गलत खान-पान की आदतें भी पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। परिणामस्वरूप भोजन सही तरह से नहीं पच पाता और पेट से जुड़ी कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
खाना न पचने पर शरीर में बनता है ‘आम’
आयुर्वेद में बताया गया है कि जब भोजन पूरी तरह नहीं पचता तो शरीर में ‘आम’ नामक विषैला पदार्थ बनने लगता है। यह धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। इससे थकान, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, एसिडिटी, गैस, अपच और मेटाबॉलिज्म कमजोर होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। चूंकि शरीर के सभी अंगों को पोषण पाचन प्रक्रिया से ही मिलता है, इसलिए कमजोर पाचन पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
ये आदतें गर्मियों में पाचन को और खराब करती हैं
गर्मी के मौसम में तला-भुना खाना, ज्यादा मसालेदार भोजन, प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा देर रात खाना खाना और अनियमित समय पर भोजन करना भी पाचन क्षमता को कमजोर करता है। ऐसे में व्यक्ति को सुस्ती, कमजोरी और पेट संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पाचन मजबूत रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और नारियल पानी, छाछ तथा नींबू पानी जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थों का सेवन करें। हल्का, ताजा और घर का बना भोजन खाएं। तरबूज, खरबूजा, खीरा, अनार जैसे पानी से भरपूर फल डाइट में शामिल करें। अधिक खाने से बचें और अपनी पाचन क्षमता के अनुसार ही भोजन करें।
योग और आयुर्वेदिक उपाय भी हैं फायदेमंद
आयुर्वेद पाचन शक्ति को मजबूत बनाने के लिए योग और प्राणायाम को बेहद प्रभावी मानता है। शीतली और भ्रामरी प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ तनाव भी कम करते हैं। नियमित सुबह की सैर, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या भी मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसके अलावा एलोवेरा, गुलकंद, गुलाब, गोंद कतीरा और चंदन जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन गर्मियों में लाभकारी माना जाता है।
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