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पेट की खराबी से भी हो सकता है डिप्रेशन? जानिए गट और दिमाग का वैज्ञानिक कनेक्शन

पेट की खराबी से भी हो सकता है डिप्रेशन? जानिए गट और दिमाग का वैज्ञानिक कनेक्शन
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, असंतुलित खान-पान और बढ़ते तनाव का असर सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हमारा पेट और दिमाग एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि पाचन तंत्र लंबे समय तक ठीक से काम नहीं करता, तो इसका असर मूड, तनाव और मानसिक संतुलन पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि डिप्रेशन एक जटिल मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसके पीछे आनुवंशिक, जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कई कारण हो सकते हैं। केवल पेट की समस्या ही इसका कारण नहीं होती, लेकिन यह कुछ लोगों में लक्षणों को प्रभावित या बढ़ा सकती है।

गट माइक्रोबायोटा और दिमाग का क्या है संबंध?

हमारी आंतों में खरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोटा कहा जाता है। ये पाचन में मदद करने के साथ-साथ शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाते हैं।

शोध बताते हैं कि आंत और दिमाग के बीच लगातार संदेशों का आदान-प्रदान होता रहता है। इस संबंध को गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। आंतों के स्वस्थ बैक्टीरिया ऐसे रसायनों के उत्पादन और नियमन में योगदान देते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें सेरोटोनिन भी शामिल है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि सेरोटोनिन केवल आंतों में बनता है या केवल वही मानसिक स्वास्थ्य तय करता है।

पेट की गड़बड़ी का मानसिक स्वास्थ्य पर असर

यदि लंबे समय तक कब्ज, गैस, अपच या पेट फूलने जैसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो कुछ लोगों में इनके साथ निम्न समस्याएं भी देखी जा सकती हैं:

  • बिना वजह उदासी महसूस होना
  • बेचैनी या घबराहट
  • चिड़चिड़ापन
  • नींद से जुड़ी समस्याएं
  • तनाव बढ़ना

ध्यान रखें कि ये लक्षण कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। यदि ये लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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आंतों को स्वस्थ रखने के आसान उपाय

पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए ये आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • भोजन में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • दही और अन्य प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का सेवन करें (यदि आपके लिए उपयुक्त हों)।
  • तला-भुना और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
  • रोज कम से कम 30 मिनट टहलें या हल्की एक्सरसाइज करें।
  • 7–9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • योग, ध्यान (Meditation) या गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों से तनाव कम करने की कोशिश करें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि आपको कई हफ्तों तक लगातार उदासी, रुचि में कमी, अत्यधिक चिंता, नींद की समस्या या आत्महत्या जैसे विचार आते हैं, तो इसे सामान्य तनाव मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत सलाह लेना सबसे सही कदम है।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.