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बच्चे की मालिश कितनी उम्र तक करनी चाहिए? जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह और जरूरी सावधानियां

बच्चे की मालिश कितनी उम्र तक करनी चाहिए? जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह और जरूरी सावधानियां

भारत में नवजात शिशु की मालिश सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा रही है। माना जाता है कि सही तरीके से की गई मालिश बच्चे को आराम, बेहतर नींद और माता-पिता के साथ मजबूत भावनात्मक जुड़ाव देती है। लेकिन इसे कब शुरू करें और कितनी उम्र तक जारी रखें, यह जानना भी उतना ही जरूरी है।

नवजात की मालिश क्यों मानी जाती है खास?

बच्चे के जन्म के बाद उसकी देखभाल में मालिश को महत्वपूर्ण माना जाता है। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि बच्चे के साथ स्पर्श के जरिए भावनात्मक जुड़ाव बनाने का भी एक माध्यम है। कई माता-पिता का मानना है कि नियमित मालिश से बच्चा अधिक शांत रहता है और उसकी नींद भी बेहतर होती है। हालांकि, हर बच्चे की जरूरत अलग होती है, इसलिए सही जानकारी के साथ ही मालिश शुरू करनी चाहिए।

मालिश कब से शुरू करनी चाहिए?

अगर बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है, तो जन्म के कुछ दिनों बाद हल्के हाथों से मालिश शुरू की जा सकती है। यदि शिशु समय से पहले पैदा हुआ है या उसे किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या है, तो मालिश शुरू करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। इससे बच्चे की स्थिति के अनुसार सही समय और तरीका तय किया जा सकता है।

कितनी उम्र तक करनी चाहिए मालिश?

विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले एक वर्ष तक नियमित और हल्के हाथों से मालिश करना लाभदायक माना जाता है। इसके बाद यदि बच्चा मालिश का आनंद लेता है, तो 2 से 3 वर्ष की उम्र तक भी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार मालिश जारी रखी जा सकती है। हालांकि, यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी पसंद और जरूरत को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

मालिश के फायदे क्या हैं?

सही तरीके से की गई मालिश बच्चे को आराम पहुंचाने में मदद कर सकती है। इससे उसकी नींद बेहतर हो सकती है और माता-पिता व बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। कुछ बच्चों में मालिश के बाद बेचैनी कम होने और शरीर को आराम मिलने का अनुभव भी देखा जाता है। हालांकि, मालिश को किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

मालिश करते समय इन बातों का रखें ध्यान

मालिश हमेशा हल्के हाथों से करें और बच्चे की नाजुक त्वचा पर अधिक दबाव न डालें। ऐसा तेल चुनें जो बच्चे की त्वचा के लिए उपयुक्त हो। किसी नए तेल का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है। यदि लालपन, खुजली या दाने दिखाई दें, तो तेल का उपयोग तुरंत बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें। साथ ही, यदि बच्चे को बुखार हो, वह लगातार रो रहा हो या अस्वस्थ महसूस कर रहा हो, तो उस समय मालिश करने से बचें।

बच्चे की मालिश उसकी दैनिक देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है, बशर्ते इसे सही तरीके और सही समय पर किया जाए। पहले एक वर्ष तक नियमित मालिश आमतौर पर लाभकारी मानी जाती है, जबकि उसके बाद यह बच्चे की जरूरत और पसंद पर निर्भर करती है। यदि किसी भी तरह की त्वचा संबंधी समस्या या स्वास्थ्य संबंधी चिंता हो, तो स्वयं निर्णय लेने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।


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