सोशल मीडिया और मोबाइल की कॉन्टैक्टकॉन्टैक्ट में भले ही सैकड़ों नाम हों, लेकिन मुश्किल वक्त में अक्सर गिने-चुने लोग ही काम आते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ समय में इंटरनेट पर “दोस्ती कैसे खत्म करें”, “बिना बताए दोस्त से दूरी कैसे बनाएं” जैसे सवाल तेजी से सर्च किए जा रहे हैं। अब लोग लंबी फ्रेंड लिस्ट से ज्यादा भरोसेमंद और सच्चे रिश्तों को महत्व दे रहे हैं।
67% लोग निभा रहे हैं सिर्फ मजबूरी वाली दोस्ती
एक सर्वे के अनुसार, करीब 67% लोग ऐसी दोस्तियां निभा रहे हैं जिनमें अब अपनापन या भावनात्मक जुड़ाव नहीं बचा है। ये रिश्ते अक्सर स्कूल, कॉलेज या पुराने ऑफिस के दोस्तों से जुड़े होते हैं, जो समय के साथ सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। वहीं 54% लोगों ने माना कि उनकी कई दोस्तियां केवल शिकायतें, ऑफिस की परेशानी, पारिवारिक तनाव या दूसरों की बुराई तक सीमित रह गई हैं। ऐसे रिश्तों को लोग केवल पुरानी यादों या अपराधबोध (गिल्ट) की वजह से ढोते रहते हैं।
हर रिश्ता निभाना संभव नहीं
रिसर्च बताती है कि एक व्यक्ति करीब 150 सामाजिक रिश्तों को ही प्रभावी ढंग से संभाल सकता है। इससे अधिक लोगों के साथ समान भरोसा, समय और भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना व्यावहारिक रूप से मुश्किल होता है। जैसे-जैसे दोस्तों की संख्या बढ़ती है, रिश्तों की गहराई कम होने लगती है। इसलिए अब लोग कम लेकिन मजबूत और भरोसेमंद दोस्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सिर्फ शिकायतों पर टिकी दोस्ती बन सकती है तनाव की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, जब दो लोग किसी तीसरे व्यक्ति या किसी मुद्दे के प्रति समान नाराजगी साझा करते हैं, तो वे जल्दी दोस्त बन जाते हैं। लेकिन अगर दोस्ती का आधार केवल चुगली, शिकायत या नकारात्मक बातें हों, तो समय के साथ यह रिश्ता मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। स्वस्थ दोस्ती वही मानी जाती है जिसमें विश्वास, सहयोग, सकारात्मक बातचीत और भावनात्मक समर्थन हो। इसलिए अब लोग ऐसे रिश्तों को छोड़कर मानसिक शांति और बेहतर संबंधों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
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