जालना में थायरॉइड मुक्त अभियान तेज़—पांच महीनों में 4,000 से अधिक निशुल्क जांचें पूरी, डॉ. राजेश सेठीया ने समाजिक संस्थाओं से सहयोग की अपील
जालना: थायरॉइड का रोग, जिसे अक्सर सामान्य थकान या हार्मोनल असंतुलन समझकर अनदेखा कर दिया जाता है, आज धीरे-धीरे एक ‘सायलेंट किलर’ के रूप में उभर रहा है। इसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए जालना जिले में बड़े पैमाने पर जागरूकता और निदान अभियान चलाया जा रहा है। सौ. जमुनाबाई शिवरतनजी बगडिया चैरिटेबल ट्रस्ट और रोटरी क्लब ऑफ जालना रेनबो के संयुक्त उपक्रम के तहत, प्रकल्प प्रमुख तथा रुबी अस्पताल के संचालक डॉ. राजेश सेठीया के नेतृत्व में वर्षभर में 10,000 निशुल्क थायरॉइड जांचें करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान शुरू होने के बाद केवल पाँच महीनों के भीतर 4,000 से अधिक नागरिकों की जांच पूरी की जा चुकी है।
पिछले वर्ष रोटरी प्रांत में “अबकी बार एक लाख पार” अभियान के दौरान डेढ़ लाख से अधिक लोगों की मुफ्त मधुमेह जांच की गई थी, जिसमें बगडिया चैरिटेबल ट्रस्ट का बड़ा योगदान रहा। उसी कार्यभावना को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष 1 जुलाई से शुरू हुआ ‘थायरॉइड मुक्त अभियान’ 30 जून 2026 तक चलेगा। अब तक 41 स्वास्थ्य शिविर स्कूलों, महाविद्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जा चुके हैं। हाल ही में गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहीद दिवस के अवसर पर छत्रपति संभाजीनगर के गुरुद्वारे में विशेष शिविर लगाया गया। वहीं, रुबी अस्पताल में दो शिविर सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और तीसरा शिविर 29 नवंबर को आयोजित होने जा रहा है।

देश में थायरॉइड की स्थिति चिंताजनक है। डॉ. सेठीया के अनुसार, आधिकारिक रूप से 4 करोड़ 20 लाख मरीज थायरॉइड से पीड़ित हैं, जबकि अनुमान है कि 10 से 15 करोड़ लोगों को इस बीमारी की जानकारी तक नहीं है। महिलाओं में इसका प्रकोप सबसे अधिक है—89 प्रतिशत महिलाएँ और 11 प्रतिशत पुरुष इससे प्रभावित हैं। समय पर जांच न होने पर यह बीमारी वंध्यत्व, हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी, मोटापा, अवसाद और मानसिक अस्थिरता जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकती है।
थायरॉइड जांच की अधिक लागत के कारण आम नागरिक अक्सर जांच कराने से बचते हैं, जिससे बीमारी अनियंत्रित हो जाती है। इसी स्थिति को देखते हुए यह निशुल्क जांच अभियान शुरू किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को समय पर निदान और जानकारी मिल सके। डॉ. सेठीया ने सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थाओं से अपील की है कि वे अपने परिसर में निशुल्क थायरॉइड शिविर आयोजित करने हेतु आगे आएं और इस जनहितकारी अभियान को मजबूत बनाएं।

थायरॉइड के लक्षणों की जानकारी देते हुए डॉ. सेठीया ने बताया कि वजन का अचानक बढ़ना या घटना, अत्यधिक थकान, नींद में बाधा, चिड़चिड़ापन, बाल झड़ना, त्वचा का सूखापन, मासिक धर्म में अनियमितता, अधिक ठंड लगना, बेचैनी, अत्यधिक भूख और हृदय गति का तेज होना इसके प्रमुख संकेत हैं। उन्होंने कहा, “रोग छुपाने से बढ़ता है, समय पर जांच कराने से रुक जाता है।”
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इन शिविरों का लाभ उठाकर स्वयं और परिवार के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखें, क्योंकि स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
मुख्य बिंदु (Main Points)
- जालना में थायरॉइड मुक्त अभियान तेजी से जारी, पांच महीनों में 4,000 से अधिक निशुल्क जांचें पूरी।
- सौ. जमुनाबाई शिवरतनजी बगडिया चैरिटेबल ट्रस्ट और रोटरी क्लब ऑफ जालना रेनबो का संयुक्त उपक्रम।
- अभियान का नेतृत्व डॉ. राजेश सेठीया कर रहे हैं; लक्ष्य 30 जून 2026 तक 10,000 मुफ्त जांचें।
- अब तक स्कूलों, कॉलेजों, उद्योगों और धार्मिक स्थलों पर 41 स्वास्थ्य शिविर आयोजित।
- भारत में 10–15 करोड़ लोग थायरॉइड से प्रभावित, महिलाओं में दर 89 फीसदी।
- थायरॉइड जांच की अधिक लागत के कारण आम जनता परीक्षण करने से बचती है।
- अनियंत्रित थायरॉइड से वंध्यत्व, हृदय रोग, मोटापा, अवसाद जैसी गंभीर समस्याएं।
- संस्थाओं से अपील—अपने परिसर में निशुल्क थायरॉइड शिविर आयोजित करें।
- मुख्य लक्षण—वजन में बदलाव, थकान, चिड़चिड़ापन, बाल झड़ना, ठंड लगना, हृदय गति तेज होना।
- संदेश: “रोग छुपाने से बढ़ता है, समय पर जांच कराने से रुक जाता है।”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. थायरॉइड क्या है?
थायरॉइड एक ग्रंथि है जो शरीर की ऊर्जा, मेटाबोलिज्म और हार्मोनल संतुलन को नियंत्रित करती है। इसके असंतुलन से कई शारीरिक समस्याएं होती हैं।
2. जालना में थायरॉइड अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
थायरॉइड जांच महंगी होने से लोग परीक्षण नहीं करवाते। लोगों को निशुल्क जांच और जागरूकता उपलब्ध कराने के लिए यह अभियान शुरू किया गया।
3. अब तक अभियान में कितनी निशुल्क जांचें हुई हैं?
अभी तक पांच महीनों में 4,000 से अधिक जांचें पूरी की जा चुकी हैं।
4. इस अभियान को कौन चला रहा है?
बगडिया चैरिटेबल ट्रस्ट, रोटरी क्लब ऑफ जालना रेनबो और रुबी अस्पताल के संयुक्त सहयोग से यह अभियान चल रहा है।
5. महिलाओं में थायरॉइड अधिक क्यों होता है?
हार्मोनल बदलाव — मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज़ के कारण महिलाओं में इसकी संभावना अधिक होती है।
6. थायरॉइड के मुख्य लक्षण क्या हैं?
वजन बढ़ना/घटना, थकान, नींद में गड़बड़ी, चिड़चिड़ापन, बाल झड़ना, ठंड लगना, भूख बढ़ना और दिल की धड़कन तेज होना।
7. अगर किसी संस्था को शिविर आयोजित करना हो तो क्या करें?
वे डॉ. राजेश सेठीया या बगडिया चैरिटेबल ट्रस्ट से संपर्क कर अपने परिसर में शिविर आयोजित कर सकते हैं।
8. क्या थायरॉइड का इलाज संभव है?
हाँ, समय पर जांच और उचित उपचार से थायरॉइड पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

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