Eye diseases are increasing in children due to mobile addiction: 702 students were fitted with glasses
जालना : बच्चों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग अब उनकी आंखों की सेहत पर भारी पड़ रहा है. खेलकूद और बाहरी गतिविधियों की बजाय मोबाइल गेम्स और वीडियो रील्स देखने की बढ़ती प्रवृत्ति ने बच्चों में आंखों की बीमारियों को जन्म दिया है. जालना जिला सामान्य अस्पताल के नेत्र विभाग द्वारा मार्च से नवंबर 2024 के बीच पहली से दसवीं कक्षा के छात्रों की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 702 बच्चों को चश्मे की जरूरत पड़ी.
*परेशान करने वाले आंकड़े:
जिला सामान्य अस्पताल ने 16,855 छात्रों की नेत्र जांच की, जिसमें 702 छात्रों को चश्मा लगाने की आवश्यकता पाई गई. जिस उम्र में बच्चों की दृष्टि का विकास होना चाहिए, उस उम्र में आंखों की कमजोर दृष्टि और चश्मे की आवश्यकता भविष्य में गंभीर समस्याओं का संकेत है.

- *समस्या की जड़:
- – माता-पिता की व्यस्त जीवनशैली और बच्चों के प्रति कम ध्यान.
- – मैदानी खेलों की कमी और बढ़ते शहरीकरण से खेलकूद के अवसरों का घटना.
- – छोटी उम्र से ही पढ़ाई का दबाव और मोबाइल की आसान उपलब्धता.
- – मोबाइल और टीवी का अत्यधिक उपयोग बच्चों की आंखों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है.
*डॉक्टरों की सलाह:
जिला सामान्य अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ यू.एल. परीतकर ने कहा, “मोबाइल और टीवी का बढ़ता उपयोग बच्चों की आंखों की समस्याओं का मुख्य कारण है. माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें और नियमित नेत्र जांच कराएं.”

- *बच्चों की आंखों की देखभाल के उपाय:
- 1. बच्चों को मोबाइल और रील्स देखने की आदत न डालें.
- 2. बच्चों को जंक फूड की बजाय हरी सब्जियों और पौष्टिक आहार दें.
- 3. साल में कम से कम एक बार बच्चों की आंखों की जांच कराएं.
- 4. अंधेरे में मोबाइल या टीवी देखने न दें.
*चिंताजनक स्थिति:
इस चौंकाने वाले आंकड़े ने अभिभावकों को सतर्क कर दिया है. अब यह जरूरी हो गया है कि बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखते हुए उन्हें मैदानी खेलों और स्वस्थ आदतों की ओर प्रेरित किया जाए, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास सही दिशा में हो सके.
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