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प्रतिबंध के बावजूद जलता है गुटखा, दम तोड़ता है पर्यावरण — अधिवक्ता की भावुक अपील मुख्यमंत्री के नाम

प्रतिबंध के बावजूद जलता है गुटखा, दम तोड़ता है पर्यावरण — अधिवक्ता की भावुक अपील

प्रतिबंध के बावजूद जलता है गुटखा, दम तोड़ता है पर्यावरण — अधिवक्ता की भावुक अपील मुख्यमंत्री के नाम

जालना (प्रतिनिधि) —

“हर रोज़ अख़बारों में करोड़ों का गुटखा पकड़े जाने की खबरें आती हैं, लेकिन क्या किसी ने सोचा है कि उसे जलाने से निकलता धुआं हमारे फेफड़ों में ज़हर बनकर समा रहा है?” — ये विचार हैं जालना के वरिष्ठ अधिवक्ता अॅड. महेश सिताराम धन्नावत के, जिन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को एक भावनात्मक पत्र लिखा है।

उन्होंने अपने ज्ञापन में लिखा कि राज्य में गुटखे पर प्रतिबंध केवल कानून की किताबों तक सीमित है, जबकि ज़मीनी हकीकत में गुटखा की अवैध बिक्री बेधड़क जारी है। करोड़ों रुपये का गुटखा जब्त होने के बाद प्लास्टिक व नायलॉन की बोरियों समेत जलाया जाता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

धन्नावत ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि जब जालना जिले की पालक मंत्री पंकजा मुंडे स्वयं पर्यावरण मंत्री हैं, तब भी जिले में गुटखा जलाने के दृश्य खुलेआम देखे जा सकते हैं।

उन्होंने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि जिस तरह कुछ राज्यों में नियंत्रित रूप से गुटखा वैध है, महाराष्ट्र में भी इसे पुनः वैध कर देना चाहिए ताकि राजस्व में वृद्धि हो और अवैध व्यापार पर रोक लगाई जा सके।

निष्कर्ष:
यह पत्र सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि एक संवेदनशील चेतावनी है — “अगर प्रतिबंध सिर्फ कागज़ों पर है और जनता धुएं में दम तोड़ रही है, तो क्या ये न्याय है?”


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Imran Siddiqui

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