कुंडलिका नदी में मृत मुर्गियों का ढेर मिलने से हड़कंप, इलाके में फैली भयावह दुर्गंध
रामतीर्थ श्मशानभूमि के पास नदी में फेंकी गईं सैकड़ों मृत मुर्गियां, नागरिकों में आक्रोश; सामाजिक कार्यकर्ता साद बिन मुबारक ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई
Jalna : जालना शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली कुंडलिका नदी एक बार फिर प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही के कारण चर्चा में आ गई है। रामतीर्थ श्मशानभूमि के पास जालना–छत्रपति संभाजीनगर मार्ग स्थित पुल के नीचे सैकड़ों मृत मुर्गियां मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में भयावह दुर्गंध फैल गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल के नीचे करीब 150 से 200 मृत मुर्गियां फेंकी गई हैं। मृत पक्षियों के सड़ने से पूरे क्षेत्र में असहनीय बदबू फैल रही है और इससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी दुर्गंध के कारण भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।
नदी का पानी प्रदूषित, पर्यावरण पर बढ़ा खतरा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुर्गियों की ढुलाई करने वाले वाहन अक्सर नदी किनारे खड़े दिखाई देते हैं। आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात लोगों ने मृत मुर्गियों को सीधे नदी में फेंक दिया, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो गया है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल नदी की स्वच्छता को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि इससे जल प्रदूषण और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। शहर की प्रमुख जलधारा मानी जाने वाली कुंडलिका नदी लगातार गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता की शिकार होती जा रही है।
दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता Saad Bin Mubarak ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मृत मुर्गियां नदी में फेंकने वालों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले महानगरपालिका अधिकारियों और स्वच्छता निरीक्षकों को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। साथ ही उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
“महानगरपालिका अधिकारी नागरिकों के फोन तक नहीं उठाते”
स्थानीय नागरिकों ने महानगरपालिका प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को फोन कर मामले की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया।
नागरिकों के अनुसार, नदी में मृत मुर्गियां मिलने की जानकारी देने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे लोगों में भारी नाराजगी और आक्रोश है।
स्वच्छता अभियानों पर फिरा पानी
कुंडलिका नदी को स्वच्छ बनाने के लिए शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और पर्यावरण संगठनों द्वारा लाखों रुपये खर्च कर कई अभियान चलाए गए थे। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण ये सभी प्रयास विफल होते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो कुंडलिका नदी का प्रदूषण आने वाले समय में शहर के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है।
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