“अगर नदी को साफ नहीं रख सकते तो प्रशासन किस काम का?”; कुंडलिका नदी में मृत मुर्गियां फेंके जाने पर भड़का आक्रोश
कार्रवाई नहीं हुई तो आमरण अनशन की चेतावनी, समस्त महाजन ट्रस्ट की नूतन देसाई ने प्रशासन को घेरा
Jalna : जालना शहर की कुंडलिका और सीना नदियों की स्वच्छता के लिए वर्षों से जनसहयोग के माध्यम से कार्य कर रहे समस्त महाजन ट्रस्ट ने अब प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। कुंडलिका नदी में बड़ी संख्या में मृत मुर्गियां फेंके जाने की घटना सामने आने के बाद ट्रस्ट की पदाधिकारी Nutan Desai ने तीखी नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन को सीधे चेतावनी दी है।
नूतन देसाई ने स्पष्ट कहा कि यदि नदी को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे पूर्णकालिक आमरण अनशन शुरू करेंगी। इस बयान के बाद शहर में नदी प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
“आठ वर्षों की मेहनत पर पानी फेर रहा प्रशासन”
नूतन देसाई ने बताया कि वे मुंबई से जालना आकर पिछले आठ वर्षों से लोकवर्गणी और जनसहयोग के माध्यम से कुंडलिका और सीना नदी की सफाई अभियान चला रही हैं। इस अभियान में कई सामाजिक संस्थाओं, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।
उन्होंने कहा कि नदी का गहरीकरण और चौड़ीकरण कर उसके अस्तित्व को बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन नदी को स्वच्छ बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने में महानगरपालिका और प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
देसाई ने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता के कारण शहर की प्रमुख नदियां फिर से प्रदूषण और गंदगी की चपेट में आती जा रही हैं।
मृत मुर्गियां मिलने के बाद मौके पर पहुंचीं नूतन देसाई
कुंडलिका नदी में मृत मुर्गियां फेंके जाने की जानकारी मिलते ही नूतन देसाई तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं और स्थिति का निरीक्षण किया। नदी में फैली गंदगी और दुर्गंध को देखकर उन्होंने प्रशासन की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त Anjali Sharma को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। आयुक्त द्वारा कर्मचारियों को घटनास्थल पर भेजा गया, लेकिन नूतन देसाई ने कहा कि घटना के बाद केवल सफाई कर्मचारियों को भेजना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नदी को गंदा करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होना अधिक जरूरी है।
“नदी फिर से नाला बनने में देर नहीं लगेगी”
नूतन देसाई ने चेतावनी देते हुए कहा कि नदियों की स्वच्छता केवल सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए, तो कुंडलिका नदी को फिर से गंदे नाले में बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
उन्होंने कहा कि शहर की महत्वपूर्ण जलधाराएं लगातार प्रदूषण की चपेट में आ रही हैं और इसका सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि नदी में मृत मुर्गियां फेंकने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
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