जालना, 15 मई 2026 — भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज जालना जिले सहित महाराष्ट्र के 18 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। अलर्ट में 15 मई को तेज आंधी, बिजली गिरने और 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। इसी के साथ मराठवाड़ा क्षेत्र में जल संकट की गंभीर स्थिति बनी हुई है। जालना, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, हिंगोली, नांदेड और लातूर जिलों में 119 गांव और 55 बस्तियों को 194 सरकारी टैंकरों से पानी दिया जा रहा है।
IMD का येलो अलर्ट — क्या है खतरा?
भारतीय मौसम विभाग के पुणे केंद्र ने 15 मई के लिए महाराष्ट्र के 18 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इसमें जालना, छत्रपति संभाजीनगर, बीड, उस्मानाबाद और अन्य मराठवाड़ा जिले शामिल हैं। अलर्ट के अनुसार इन जिलों में दोपहर बाद तेज आंधी-तूफान, बिजली चमकने और ओले गिरने की संभावना है। हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
जिला प्रशासन ने इस चेतावनी के मद्देनजर आपातकालीन टीमें तैयार की हैं। पेड़ों की छंटाई, होर्डिंग की जांच और बिजली तारों का निरीक्षण किया जा रहा है। जालना के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे आंधी के दौरान खुले मैदान में न रहें और पुराने मकानों में सावधानी बरतें।
जल संकट की गंभीर तस्वीर
गर्मी के इस मौसम में जालना जिले के साथ-साथ पूरे मराठवाड़ा में पानी की किल्लत बेहद गंभीर हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15 मई 2026 तक जालना, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, हिंगोली, नांदेड और लातूर जिलों के 119 गांव और 55 बस्तियों को 194 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इनमें से जालना जिले में सबसे अधिक टैंकर तैनात हैं।
जलाशयों में पानी का स्तर बेहद कम हो गया है और कुएं-हैंडपंप सूख रहे हैं। कई गांवों में महिलाओं को 3-4 किलोमीटर दूर तक पानी लाने जाना पड़ रहा है। टैंकर अनियमित समय पर आते हैं, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
प्रशासन के उपाय
जालना जिला प्रशासन ने जल संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिला परिषद ने नए हैंडपंप खुदवाने और पुराने की मरम्मत के लिए विशेष बजट जारी किया है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं और उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
- 194 सरकारी टैंकर प्रभावित गांवों में नियमित आपूर्ति कर रहे हैं।
- स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल और ORS उपलब्ध कराई जा रही है।
- ग्राम सेवकों को हर हफ्ते जल उपलब्धता की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
- जालना नगरपालिका ने शहरी क्षेत्रों में पानी वितरण का नया शेड्यूल बनाया है।
किसानों और पशुपालकों पर असर
जालना “बीज नगरी” के नाम से जाना जाता है। यहाँ के किसान न केवल पेयजल की कमी से जूझ रहे हैं, बल्कि सिंचाई के लिए पानी मिलना भी मुश्किल हो गया है। खरीफ सीजन की तैयारी के लिए पानी जरूरी है और इसकी कमी से बुवाई में देरी हो सकती है। पशुपालक किसानों के सामने मवेशियों के लिए पानी और चारे का संकट खड़ा हो गया है।
कृषि विभाग ने सलाह दी है कि किसान सुबह जल्दी या शाम को सिंचाई करें और ड्रिप सिस्टम अपनाएं। जिला पशुपालन विभाग ने गांव स्तर पर पशु आश्रय केंद्रों में पानी की व्यवस्था का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य पर खतरा
तेज गर्मी और पानी की कमी का असर जन स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। जालना सिविल हॉस्पिटल में heat stroke, dehydration और दस्त-उल्टी के मामलों में इजाफा हुआ है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे भरपूर पानी पिएं, ORS का उपयोग करें और दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें।
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलें।
- खूब पानी पिएं और ORS का सेवन करें।
- सूती, हल्के रंग के कपड़े पहनें।
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखें।
किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल के लिए राज्य सरकार की 108 Ambulance और 104 Health Helpline पर कॉल करें। जालना जिला आपदा नियंत्रण कक्ष का नंबर: 02482-222001।
मानसून कब आएगा?
इस मुश्किल दौर में जालना के नागरिकों से अपील है कि पानी व्यर्थ न करें, एक-दूसरे की मदद करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। साथ ही आंधी-तूफान के अलर्ट को गंभीरता से लें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
