उपभोक्ता आयोग की महावितरण को फटकार, गलत बिजली बिल मामले में ग्राहक को बड़ी राहत
अवास्तव बिजली बिल रद्द, महावितरण पर 15 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश
जालना : जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में महावितरण की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एक उपभोक्ता को बड़ी राहत प्रदान की है। आयोग ने औसत से कई गुना अधिक बिजली बिल भेजकर उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी पहुंचाने के मामले में महावितरण को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने त्रुटिपूर्ण बिजली बिल रद्द करने के साथ-साथ महावितरण को उपभोक्ता को कुल 15 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
यह फैसला जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग की अध्यक्ष अपर्णा हेमंत काटे तथा सदस्य उदय दत्त दलवी और संतोष चागदेव निकुले की पीठ ने सुनाया।
अचानक आया 23 हजार रुपये का बिजली बिल
मामले के अनुसार, मधुवन कॉलोनी, पुराना जालना निवासी रामेश्वर बंडीराम ईडालकर को महावितरण की ओर से अचानक 23 हजार 570 रुपये का बिजली बिल भेजा गया। जबकि उनका सामान्य मासिक बिजली बिल लगभग 500 रुपये के आसपास आता था।
इतना अधिक बिल देखकर उपभोक्ता हैरान रह गया। इसके बाद उन्होंने महावितरण कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और बिल में हुई गड़बड़ी की जानकारी दी।
जालना जिले की अन्य खबरों के लिए पढ़ें :
Latest Jalna News – NewsNationOnline.com
जांच में सामने आई बिलिंग त्रुटि
शिकायत मिलने के बाद महावितरण अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि उपभोक्ता के घर में केवल एक कमरे में बिजली का उपयोग हो रहा था और जारी किया गया बिल वास्तविक खपत से मेल नहीं खा रहा था।
निरीक्षण रिपोर्ट में बिल त्रुटिपूर्ण होने की बात सामने आने के बावजूद महावितरण ने बिल में कोई सुधार नहीं किया। इतना ही नहीं, उपभोक्ता पर बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर भुगतान का दबाव भी बनाया गया।
लगातार हो रही मानसिक परेशानी और विभागीय अनदेखी से परेशान होकर रामेश्वर ईडालकर ने जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।
बिजली उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी के लिए पाठक National Consumer Helpline तथा Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited (MSEDCL) की वेबसाइट भी देख सकते हैं।
आयोग में उपभोक्ता की ओर से रखा गया पक्ष
उपभोक्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश एस. धन्नावत ने आयोग के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि महावितरण ने न केवल गलत बिजली बिल जारी किया, बल्कि अपने अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद भी उसमें सुधार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि शिकायत की अनदेखी करना और बिजली काटने की धमकी देना सेवा में गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। इसके कारण उपभोक्ता को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ता धन्नावत ने आयोग के सामने यह भी कहा कि बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय कई बार उन पर अनावश्यक दबाव बनाती हैं, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग ने माना सेवा में गंभीर त्रुटि
अधिवक्ता महेश धन्नावत की दलीलों को स्वीकार करते हुए आयोग ने महावितरण को सेवा में त्रुटि का दोषी माना। आयोग ने अपने अंतिम आदेश में जुलाई 2023 के बाद जारी किए गए सभी त्रुटिपूर्ण बिजली बिल रद्द करने के निर्देश दिए।
साथ ही आयोग ने कहा कि उपभोक्ता रामेश्वर ईडालकर केवल वास्तविक बिजली उपयोग के आधार पर 11 हजार रुपये 30 दिनों के भीतर जमा करेंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में महावितरण वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर ही बिजली बिल जारी करेगा।
15 हजार रुपये मुआवजे का आदेश
उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी और विभागीय लापरवाही को गंभीर मानते हुए आयोग ने महावितरण को उपभोक्ता को 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके अलावा 5 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का भी निर्देश दिया गया।
इस प्रकार महावितरण को कुल 15 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
उपभोक्ता अधिकारों और आयोग से जुड़ी जानकारी के लिए पाठक Department of Consumer Affairs की वेबसाइट भी देख सकते हैं।
“यह आम उपभोक्ता की बड़ी जीत” : अधिवक्ता महेश धन्नावत
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ता महेश एस. धन्नावत ने कहा कि यह केवल एक उपभोक्ता की जीत नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की बड़ी जीत है।
उन्होंने कहा, “बिजली कंपनियां मनमाने तरीके से बिल जारी कर उपभोक्ताओं की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। आयोग का यह फैसला अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी उपभोक्ता को गलत या अत्यधिक बिजली बिल मिलता है, तो वह कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तकनीकी त्रुटियों, गलत मीटर रीडिंग या बिलिंग सिस्टम की गड़बड़ी के कारण उपभोक्ताओं को अवास्तव बिजली बिल भेज दिए जाते हैं। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को घबराने के बजाय संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करानी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता आयोग का सहारा लेना चाहिए।
यह फैसला उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो गलत बिजली बिल और विभागीय लापरवाही से परेशान रहते हैं।
गलत बिजली बिलों पर लग सकती है रोक
जिला उपभोक्ता आयोग के इस फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में बिजली वितरण कंपनियां बिल जारी करते समय अधिक सावधानी बरतेंगी। साथ ही उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने पर भी जोर बढ़ेगा।
जालना में आया यह फैसला अब उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और सरकारी सेवाओं में जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
हावितरण गलत बिजली बिल मामला
Discover more from NewsNation Online
Subscribe to get the latest posts sent to your email.








































































































Leave a Reply