डिजिटल इंडिया चाहिए, लेकिन जनता की कीमत पर नहीं: पानी पहले नागरिकों को, फिर डेटा सेंटरों को – वरिष्ठ अधिवक्ता महेश धन्नावत
जालना | News Nation Online
देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकारें डिजिटल अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए नई नीतियां लागू कर रही हैं। महाराष्ट्र भी डेटा सेंटर निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
इसी बीच जालना के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश धन्नावत ने डेटा सेंटरों की बढ़ती जल एवं बिजली खपत को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि देश का डिजिटल विकास आवश्यक है, लेकिन यह आम नागरिकों के पेयजल, कृषि और घरेलू जरूरतों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
एल नीनो की आशंका के बीच बढ़ी चिंता
महेश धन्नावत ने कहा कि मौसम विशेषज्ञों द्वारा इस वर्ष एल नीनो के प्रभाव के कारण महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में वर्षा कम होने और सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका व्यक्त की गई है। ऐसे समय में सरकार को जल और ऊर्जा संसाधनों के उपयोग की प्राथमिकता स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“डिजिटल इंडिया का हम स्वागत करते हैं, लेकिन सबसे पहले नागरिकों को पीने का पानी, किसानों को सिंचाई और घरों के लिए आवश्यक बिजली उपलब्ध कराना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके बाद ही उद्योगों और डेटा सेंटरों की आवश्यकताओं पर विचार किया जाना चाहिए।”
डेटा सेंटरों की बढ़ती जल एवं बिजली खपत
हाल ही में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट में डेटा सेंटरों द्वारा पानी और बिजली की बढ़ती खपत को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्याधुनिक डेटा सेंटरों को सर्वर ठंडे रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी तथा निर्बाध बिजली की आवश्यकता होती है। भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ इन संसाधनों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। (Power Line Magazine)
धन्नावत का कहना है कि यदि समय रहते टिकाऊ नीति नहीं बनाई गई तो भविष्य में जल संकट और ऊर्जा दबाव दोनों गंभीर चुनौती बन सकते हैं।
महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहा डेटा सेंटर क्षेत्र
महाराष्ट्र पहले से ही देश के प्रमुख डेटा सेंटर राज्यों में शामिल है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश होने की संभावना है। इसके साथ ही बिजली, पानी, भूमि और पर्यावरणीय संसाधनों पर दबाव भी बढ़ सकता है। (ETTelecom.com)
सरकार के लिए महेश धन्नावत के प्रमुख सुझाव
1. जल पुनर्चक्रण अनिवार्य किया जाए
सभी डेटा सेंटरों के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (Zero Liquid Discharge) तथा पानी के पुनर्चक्रण की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। नए डेटा सेंटरों को अनुमति देने से पहले संबंधित क्षेत्र में जल उपलब्धता का स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलन कराया जाए।
2. हरित ऊर्जा को प्राथमिकता
डेटा सेंटरों को कम से कम 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से लेने का प्रावधान किया जाए, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बिजली भार न पड़े।
3. जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाया जाए
उन्होंने नागरिकों से आगामी गणेश उत्सव में छोटी प्रतिमाओं के उपयोग और जल संरक्षण को अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि इससे पानी की बचत के साथ जल प्रदूषण भी कम होगा।
4. सूचना के अधिकार की रक्षा
महेश धन्नावत ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) नियम-2026 में अधिवक्ताओं की सुनवाई पर रोक लगाने वाले प्रावधान को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नागरिकों के सूचना प्राप्त करने और न्याय तक पहुंचने के अधिकार को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की मांग
धन्नावत ने राज्य सरकार से डेटा सेंटर नीति की व्यापक समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पर्यावरण विशेषज्ञों, जल संसाधन विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जा सके।
उन्होंने कहा,
“हमें विकास चाहिए, लेकिन ऐसा विकास जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और टिकाऊ हो। पानी और बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की अनदेखी कर किया गया विकास लंबे समय तक देश के हित में नहीं हो सकता।”
निष्कर्ष
भारत तेजी से डिजिटल महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डेटा सेंटर इस विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार हैं, लेकिन इनके विस्तार के साथ जल संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाया गया तो भारत डिजिटल प्रगति के साथ-साथ सतत विकास का भी वैश्विक उदाहरण बन सकता है. (Niti For States)
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उपयोगी संदर्भ
- भारत सरकार की ड्राफ्ट डेटा सेंटर नीति (MeitY): https://www.nitiforstates.gov.in/public-assets/Policy/policy_files/PNC510C000384.pdf
- भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र और स्थिरता पर विश्लेषण: https://powerline.net.in/2026/03/23/digital-backbone-data-centres-emerge-as-a-strategic-infrastructure-asset/
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