जालना: जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो हमारे मुश्किल वक्त में बिना किसी स्वार्थ के हमारा हाथ थामते हैं। जब हम टूट रहे होते हैं, तब वे हमें संभालते हैं और आगे बढ़ने का हौसला देते हैं। ऐसे लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उनके एहसान को सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि अच्छे कामों के जरिए याद रखना चाहिए।
उपकार का बदला तिरस्कार से नहीं, सम्मान और अच्छे कर्मों से चुकाना चाहिए। यह प्रेरणादायक संदेश माऊली भक्त डॉ. एडवोकेट दीपक कोल्हे ने जालना में दिया। हनुमान घाट स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित अखंड हरिनाम सप्ताह के दौरान उनका हरिकीर्तन हुआ। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और संत ज्ञानेश्वर माऊली के जीवन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अच्छे विचारों और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
मुश्किल वक्त में साथ देने वालों को कभी न भूलें
डॉ. कोल्हे ने कहा कि जिंदगी में आगे बढ़ते समय उन लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया। अगर किसी ने हमें एक कदम आगे बढ़ने में मदद की है, तो समय आने पर हमें भी किसी दूसरे का हाथ थामना चाहिए। यही इंसानियत है और यही जीवन की असली खूबसूरती है।
सच्ची मदद वह है, जिसे बार-बार याद दिलाने की जरूरत न पड़े
उन्होंने कहा कि किसी की मदद करने के बाद उसका एहसान बार-बार जताना सही नहीं है। सच्ची मदद वह है, जिसे याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती। फूल कभी अपनी खुशबू का प्रचार नहीं करता। वह सिर्फ खिलता है और उसकी खुशबू खुद-ब-खुद चारों तरफ फैल जाती है। इंसान के अच्छे कर्म भी ऐसे ही होने चाहिए।
जरूरतमंद का सहारा बनना ही असली इंसानियत
डॉ. कोल्हे ने कहा कि संतों की सीख हमें बताती है कि जिंदगी सिर्फ अपने लिए जीने का नाम नहीं है। हमारे आसपास कोई दुखी, परेशान या मुश्किल में है तो उसकी मदद के लिए आगे आना ही असली इंसानियत है। समाज में ऐसे हजारों हाथ खड़े होने चाहिए, जो जरूरतमंदों को सहारा दें और उन्हें फिर से खड़े होने की ताकत दें।
उन्होंने कहा कि अच्छे रास्ते पर चलना हमेशा आसान नहीं होता। कई बार मुश्किलें और गलत ताकतें रास्ता रोकने की कोशिश करती हैं। ऐसे समय में डरकर पीछे हटने के बजाय सच्चाई और अच्छाई के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
दूसरों के लिए मदद का हाथ बढ़ाएं
श्रद्धालुओं से अपील करते हुए डॉ. कोल्हे ने कहा कि जिसने हमें जिंदगी में आगे बढ़ने में मदद की, उसके एहसान को अपने दिल में जिंदा रखें और उसी तरह किसी दूसरे जरूरतमंद के लिए मदद का हाथ बढ़ाएं। यही उपकार का सबसे खूबसूरत बदला है और यही संतों की सच्ची सीख है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद
कार्यक्रम में मनोज गुलवे, पूर्व नगरसेवक संजय गायकवाड, प्रकाश घोडे, गेंदालाल झुंगे, सुभाष चोपडे, संजय कानडे, बाबूराव इंगले, रवि झुंगे, बबनराव गोडबोले, तुलशीराम खरात, रमेश पवार, गीताराम गुलमकर, गोपालराव ठोकल, माऊली कोल्हे और पवन झुंगे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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आधिकारिक जानकारी
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डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी जानकारी और वक्ता के संदेश पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ता के हैं।



