पणजी/विशेष प्रतिनिधि: एक साल से ज्यादा पुराने जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत तय न्यायिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है और केवल मामलेदार जैसे कार्यकारी अधिकारी के आदेश के आधार पर पुरानी जन्म एंट्री को वैध नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति वाल्मिकी मिनेझिस की पीठ ने Savio Jose Xavier Viegas v. Dr. Mariano Godinho & Others, Writ Petition No. 408 of 2024 मामले में यह फैसला सुनाया। LiveLaw के अनुसार, अदालत ने कहा कि एक साल से अधिक समय बाद जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन Judicial Magistrate First Class (JMFC) के आदेश पर ही किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण: इस मामले में याचिकाकर्ता का जन्म 11 जून 1975 बताया गया था और 1999 में, यानी करीब 24 साल बाद, जन्म रजिस्ट्रेशन कराया गया था। अदालत ने माना कि इतने लंबे समय बाद रजिस्ट्रेशन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी था।
24 साल बाद कराया गया था जन्म का रजिस्ट्रेशन
मामले में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि 1999 में जन्म का रजिस्ट्रेशन तिसवाड़ी के मामलेदार के 11 सितंबर 1999 के आदेश के आधार पर किया गया था। मामलेदार एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट थे। बाद में पणजी नगर निगम के आयुक्त ने 22 नवंबर 1999 के जन्म रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ याचिका हाईकोर्ट पहुंची।
धारा 13(3) में क्या है प्रावधान?
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969 की धारा 13 देरी से जन्म या मृत्यु दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़ी है। हाईकोर्ट ने धारा 13(3) की व्याख्या करते हुए कहा कि एक साल से ज्यादा देरी वाले रजिस्ट्रेशन के लिए कानून में तय न्यायिक अधिकार क्षेत्र का पालन करना होगा।
अदालत ने कहा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास न्यायिक मजिस्ट्रेट जैसी जांच और फैसला देने की शक्तियां नहीं हैं। इसलिए एक साल से ज्यादा पुराने जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में केवल कार्यकारी अधिकारी के आदेश के आधार पर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती।
पुराने जन्म प्रमाणपत्रों की जांच जरूरी
हाईकोर्ट के फैसले का असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जिनमें जन्म या मृत्यु की एंट्री कई साल बाद कराई गई है। अदालत ने यह भी माना कि अगर रजिस्टर में कोई एंट्री गलत या अनुचित तरीके से की गई हो तो रजिस्ट्रार कानून के तहत जरूरी कार्रवाई कर सकता है।
कानूनी जानकार एडवोकेट महेश धनावत ने फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों को लेकर कई बार विवाद सामने आते हैं। ऐसे दस्तावेज संपत्ति और दूसरे कानूनी विवादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन में जांच और पारदर्शिता जरूरी है।
गोवा में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए क्या करें?
गोवा सरकार के Registration Department के मुताबिक जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड से जुड़ी सेवाएं संबंधित स्थानीय प्राधिकरण, जैसे पंचायत या नगर पालिका, के माध्यम से उपलब्ध होती हैं। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारी दी गई है।
कानून की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?
कानून का मूल पाठ India Code पर उपलब्ध है। फैसले की विस्तृत रिपोर्ट LiveLaw पर पढ़ी जा सकती है।
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नोट: यह खबर न्यायिक फैसले और उपलब्ध प्रकाशित कानूनी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। किसी व्यक्तिगत जन्म या मृत्यु रजिस्ट्रेशन मामले में संबंधित अधिकारी या योग्य कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

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