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आला हजरत ने लिखीं एक हजार से ज्यादा किताबें, 50 से अधिक इल्म और फन के थे माहिर

A large group of Muslim men and boys sit cross‑legged in a circle on patterned carpets inside a mosque courtyard, many wearing traditional caps and white robes. construction scaffolding and green pillars are visible in the background.

जालना: शहर की मशहूर दरगाह सैयद अहमद शेर सवार में रविवार को 108वां उर्स-ए-आला हजरत इमाम अहले सुन्नत बड़े ही अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान कुरआन ख्वानी, कुल शरीफ, फातिहा ख्वानी और नात-ए-पाक का आयोजन किया गया। इसके साथ ही लंगर-ए-रजा भी तकसीम किया गया।

दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील मौलाना ने इमाम अहमद रजा खान की इल्मी और दीनी सेवाओं के बारे में जानकारी दी

दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील मौलाना ने अपने बयान में इमाम अहमद रजा खान बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह की इल्मी और दीनी सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आला हजरत ने अपनी जिंदगी दीन और इल्म की खिदमत में लगा दी और अलग-अलग इल्म व फन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया।

सैयद जमील मौलाना ने कहा कि आला हजरत ने एक हजार से ज्यादा किताबें लिखीं और वे 50 से अधिक इल्म और फन के माहिर थे। उनके लिखे हुए साहित्य और रिसर्च से आज भी बड़ी संख्या में लोग फायदा उठा रहे हैं।

आला हजरत की इल्मी विरासत में दीनी विषयों के साथ-साथ भाषा, साहित्य, फिकह और दूसरे विषयों से जुड़ी रचनाएं भी शामिल हैं। उनकी जिंदगी और लेखन पर कई किताबें और अध्ययन उपलब्ध हैं। आला हजरत की रचनाओं और इल्मी काम के बारे में यहां पढ़ें

कुरआन ख्वानी से शुरू हुआ कार्यक्रम

उर्स के कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 2 बजे कुरआन ख्वानी से हुई। इसके बाद दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर कुल शरीफ और फातिहा ख्वानी की गई। नायब सज्जादा सैयद हसनैन रजा ने नात-ए-पाक पेश की। नात के दौरान दरगाह परिसर में मौजूद अकीदतमंदों का माहौल पूरी तरह रूहानी नजर आया।

अकीदतमंदों के लिए लंगर-ए-रजा का इंतजाम

उर्स के मौके पर लंगर-ए-रजा भी तकसीम किया गया। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। दरगाह परिसर में कार्यक्रम के दौरान लोगों की आवाजाही बनी रही और धार्मिक माहौल देखने को मिला।

साइंस और दूसरे विषयों में भी काम का किया जिक्र

अपने बयान में सैयद जमील मौलाना ने कहा कि इमाम अहमद रजा खान बरेलवी सिर्फ एक बड़े आलिम, मुफ्ती, मुहद्दिस और फकीह ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने साइंस, फलसफे और दूसरे इल्म के क्षेत्रों में भी काम किया। उन्होंने कहा कि आला हजरत की कई किताबें और रिसर्च आज भी इल्म हासिल करने वालों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने बताया कि आला हजरत ने दीनी विषयों के अलावा वैज्ञानिक विषयों और अलग-अलग इल्म व फन पर भी बड़ी संख्या में किताबें लिखीं। उनके मुताबिक, वैज्ञानिक विषयों से जुड़ी उनकी किताबों की संख्या करीब 150 तक बताई जाती है।

आला हजरत की किताबों और उनके इल्मी काम को लेकर अलग-अलग स्रोतों में आंकड़ों में अंतर भी मिलता है। आला हजरत की आधिकारिक दरगाह वेबसाइट के अनुसार, उनकी रचनाओं की सटीक संख्या तय करने के लिए अभी भी शोध की जरूरत बताई गई है। आला हजरत की रचनाओं की जानकारी यहां देखें

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

उर्स के कार्यक्रम में हाफिज काजी उमर, मौलाना नौशाद रजा, मौलाना तौफीक मिस्बाही, मौलाना फैज मिस्बाही, कारी मसीहुद्दीन, मौलाना नसीर अमजदी, मौलाना अरमान अलीमी, हाफिज रेहान रजा, कारी मुजाहिद, हाफिज गुलाम यासीन रिजवी, हाफिज अनीस अशरफी, हाफिज मुनव्वर रजा, हाफिज सरताज, हाफिज अबरार, हाफिज असरार, हाजी अनवर मेमन, हाजी अब्दुलअजीज ममदानी, साजिद पाडीला, मुनव्वर खान लाला, अय्यूब खान दुबई और असदुल्लाह रिजवी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

उर्स के दौरान दरगाह परिसर में नात, कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी और लंगर के बीच अकीदत और धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होकर उर्स में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

आला हजरत की किताबों और इल्मी विरासत के बारे में

इमाम अहमद रजा खान की किताबों और इल्मी विरासत पर कई डिजिटल संग्रह भी उपलब्ध हैं। आला हजरत की किताबों और जीवनी से संबंधित डिजिटल संग्रह में उनकी जीवनी, रचनाओं और विभिन्न विषयों पर प्रकाशित सामग्री की जानकारी दी गई है।

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External reference: आधिकारिक दरगाह वेबसाइट के अनुसार आला हजरत ने विभिन्न विषयों पर बड़ी संख्या में किताबें और रिसाले लिखे और 50 से अधिक ज्ञान-शाखाओं में दक्षता का उल्लेख मिलता है।


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आला हजरत की रचनाएं और इल्मी कार्य – आधिकारिक दरगाह वेबसाइट
आला हजरत की किताबों का डिजिटल संग्रह

A large group of Muslim men and boys sit cross‑legged in a circle on patterned carpets inside a mosque courtyard, many wearing traditional caps and white robes. construction scaffolding and green pillars are visible in the background.
Large group of men and boys sitting cross‑legged on a patterned carpet under a shaded canopy in a mosque courtyard, likely during a communal gathering or prayer.

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Imran Siddiqui

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