नई दिल्ली: तमिलनाडु में SASTRA यूनिवर्सिटी से जुड़े सरकारी जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से ओपन-एयर जेल के लिए वैकल्पिक जमीन पर विचार करने को कहा है। 21 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत यूनिवर्सिटी के कथित अतिक्रमण को सही नहीं ठहरा रही, लेकिन यह भी देख रही है कि मौजूदा शैक्षणिक ढांचे को गिराए बिना सार्वजनिक उद्देश्य पूरा करने का कोई व्यावहारिक रास्ता निकाला जा सकता है या नहीं।
पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। मामला SASTRA की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की जमीन के आवंटन/अदला-बदली की मांग को स्वीकार नहीं किया था और बेदखली की कार्रवाई का रास्ता साफ किया था। LiveLaw की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई थी।
31.37 एकड़ सरकारी जमीन को लेकर विवाद
विवाद तंजावुर जिले के थिरुमलाईसमुथिरम गांव की करीब 31.37 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है। यह जमीन जेल विभाग को ओपन-एयर जेल स्थापित करने के लिए दी गई थी। राज्य सरकार का कहना है कि SASTRA यूनिवर्सिटी ने इस जमीन पर कब्जा कर निर्माण किया, जिसके कारण प्रस्तावित जेल परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद तमिलनाडु भूमि अतिक्रमण कानून के तहत बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने वैकल्पिक जमीन का सुझाव क्यों दिया?
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को ओपन-एयर जेल के लिए खुली जमीन चाहिए, तो मौजूदा यूनिवर्सिटी भवनों को गिराना ही जरूरी क्यों है। अदालत ने संकेत दिया कि राज्य सरकार अपनी जरूरत के मुताबिक दूसरी जमीन चिन्हित कर सकती है और SASTRA को उस जमीन की कीमत वहन करने के लिए कहा जा सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैकल्पिक जमीन का मतलब सरकारी हितों से समझौता करना नहीं है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें तमिलनाडु सरकार को एक पैसा या जमीन का एक इंच भी नुकसान न हो। अदालत ने यह भी कहा कि ओपन-एयर जेल की जरूरतों और सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़े मानकों में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाला फैसला नहीं होगा
तमिलनाडु सरकार ने वैकल्पिक जमीन के प्रस्ताव का विरोध किया। राज्य की ओर से दलील दी गई कि अगर सरकारी जमीन पर कब्जे के बाद वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था स्वीकार की जाती है, तो इससे भविष्य में दूसरे अतिक्रमणकारियों को भी ऐसी मांग करने का आधार मिल सकता है। सरकार ने यह भी कहा कि SASTRA की ओर से सुझाई गई वैकल्पिक जमीनें स्थान, पहुंच और पर्याप्त एकमुश्त क्षेत्रफल के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदेश को इस तरह तैयार किया जा सकता है कि वह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को प्रोत्साहित करने वाला उदाहरण न बने। अदालत ने यह संभावना भी जताई कि वैकल्पिक जमीन की कीमत सामान्य बाजार मूल्य से काफी अधिक रखी जा सकती है, ताकि अतिक्रमण से कोई आर्थिक लाभ न मिले।
1985 से प्रस्तावित है ओपन-एयर जेल परियोजना
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि ओपन-एयर जेल की परियोजना 1985 में प्रस्तावित होने के बावजूद अब तक पूरी क्यों नहीं हुई। CJI ने राज्य से पूछा कि अगर तय जमीन मुकदमे में फंस गई थी, तो परियोजना के लिए किसी दूसरी जगह जमीन तलाशकर काम आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया।
अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि यदि राज्य की वास्तविक जरूरत जेल के लिए खुली जमीन हासिल करना है, तो किसी वैकल्पिक स्थान से वही सार्वजनिक उद्देश्य पूरा किया जा सकता है या नहीं।
यूनिवर्सिटी ने तीन वैकल्पिक जमीनों का प्रस्ताव दिया
SASTRA की ओर से अदालत को बताया गया कि यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार के सामने तीन वैकल्पिक जमीनों के विकल्प रखे थे। इनमें एक विकल्प करीब 86.8 एकड़ की जमीन का बताया गया। यूनिवर्सिटी के वकील के अनुसार राज्य ने शुरुआत में इस विकल्प में रुचि दिखाई थी, लेकिन बाद में उसका रुख बदल गया।
राज्य सरकार की ओर से इन जमीनों की उपयुक्तता पर आपत्ति जताई गई। राज्य के अनुसार प्रस्तावित जमीनें विवादित जमीन की तुलना में कम मूल्यवान, बिखरी हुई या पहुंच के लिहाज से कम सुविधाजनक हो सकती हैं।
अदालत ने कहा—वैकल्पिक साइट यूनिवर्सिटी से सटी न हो
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि अगर वैकल्पिक जमीन पर ओपन-एयर जेल बनाई जाती है तो वह यूनिवर्सिटी के बिल्कुल पास या उससे सटी हुई नहीं होनी चाहिए। अदालत ने राज्य से ऐसी जगह तलाशने को कहा जो पहुंच के लिहाज से उपयुक्त हो और परियोजना की जरूरतों को पूरा कर सके।
मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर की सुनवाई में विवाद का अंतिम फैसला नहीं सुनाया। तमिलनाडु सरकार की ओर से अदालत के सुझावों पर निर्देश लेने के लिए समय मांगा गया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया गया।
इस मामले में आगे यह महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार वैकल्पिक जमीन के सुझाव पर क्या रुख अपनाती है और क्या ऐसी जमीन चिन्हित की जाती है जो ओपन-एयर जेल की जरूरतों को पूरा करती हो। फिलहाल अदालत की टिप्पणियां सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियां हैं, इन्हें अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता।
मामला: Shanmugha Arts Science Technology and Research Academy (SASTRA) बनाम State of Tamil Nadu, SLP (C) Nos. 2359-2360/2026.
स्रोत: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर LiveLaw, Bar & Bench और The New Indian Express की रिपोर्टिंग।

