जालना, प्रतिनिधि। भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को सही दिशा देने वाला आधार है। सभी शास्त्रों का सार भी भक्ति में ही समाया हुआ है। जिस व्यक्ति के मन में ईश्वर और जीवन मूल्यों के प्रति सच्ची आस्था होती है, उसका जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है। लेकिन मन में ईर्ष्या, स्वार्थ और अहंकार भरा हो तो सच्ची भक्ति का अनुभव नहीं हो सकता। यह बात श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के महामंत्री तथा श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास, मथुरा के उपाध्यक्ष प.पू. राष्ट्रीय संत स्वामी गोविंददेवगिरीजी महाराज ने कही।
श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन दिया संदेश
मंठा रोड स्थित आईसाहेब लॉन्स में भक्ति ज्ञानगंगा श्रीमद्भागवत कथा समिति और सकल हिंदू समाज की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार, 21 सितंबर को स्वामी गोविंददेवगिरीजी महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य यजमान विष्णुकुमार चेचानी और दैनिक यजमान कैलास रामेश्वर लोया के हाथों पूजा-अर्चना से हुई।
भागवत जीवन के विकार दूर करने की राह दिखाती है
स्वामी गोविंददेवगिरीजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा सुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इंसान को अपने भीतर झांकने और जीवन के विकारों को दूर करने की प्रेरणा देती है। जब व्यक्ति के जीवन में भक्ति का भाव आता है, तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा और भौतिक सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है। माता-पिता को उनमें भारतीय संस्कृति, नैतिकता और अध्यात्म के संस्कार भी विकसित करने चाहिए। संस्कारों की मजबूत नींव ही अच्छे परिवार, समाज और देश का निर्माण कर सकती है।
नामस्मरण से मिलता है मन को सहारा
कलियुग में कठिन तपस्या या बड़े-बड़े यज्ञ करने के बजाय भगवान का सच्चे मन से नामस्मरण करना महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और समर्पण के साथ किया गया नामस्मरण व्यक्ति को जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देता है। इस दौरान भजनों की प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु तालियों के साथ भक्ति में लीन नजर आए।
श्रद्धालुओं ने की आरती
कथा के समापन पर आरती का आयोजन किया गया। अमोल बांगड, मनोज पाचफुले, मनोज मोहता, नंदकीशोर बरांजलावाला, डॉ. प्रेमचंद संचेती, राजेश लड्डा, रमेश तोतला, अनिल रमेशचंद्र सोनी, रेवती रूपेश करवा, रितेश मिश्रा, संजय अग्रवाल, संजय राठी, पृथ्वीराज राजपुत, रमाकांत शुक्ला और रतन बजाज ने आरती में सहभाग लिया।
26 सितंबर तक चलेगी श्रीमद्भागवत कथा
आयोजकों के अनुसार, सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 26 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक किया जा रहा है। भक्ति ज्ञानगंगा श्रीमद्भागवत कथा समिति और सकल हिंदू समाज ने श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।


