कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में नर्मदा जल को विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाने वाली स्लीमनाबाद टनल का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 11.95 किलोमीटर लंबी इस विशाल सुरंग को देश की सबसे लंबी सिंचाई टनलों में शामिल किया जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सुरंग का करीब 96.66 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अंतिम हिस्से का काम तेजी से चल रहा है।
जर्मन टनल बोरिंग मशीन ने संभाला मुश्किल काम
इस परियोजना में भूमिगत चट्टानों, कठोर मार्बल, लाइमस्टोन और डोलोमाइट के साथ-साथ भारी पानी के रिसाव जैसी चुनौतियां सामने आईं। सुरंग निर्माण के लिए जर्मनी की हेरेनकनेक्ट टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पहले इस्तेमाल की गई अमेरिकी तकनीक को कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिसके बाद जर्मन मशीन और विशेष ग्राउटिंग तकनीक की मदद से काम आगे बढ़ाया गया।
लगभग 12 किलोमीटर लंबी है स्लीमनाबाद टनल
स्लीमनाबाद टनल की लंबाई करीब 11.952 किलोमीटर और व्यास लगभग 10.14 मीटर बताया गया है। इस सुरंग का उद्देश्य नर्मदा नदी के पानी को गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रवाह के जरिए आगे ले जाना है। परियोजना पूरी होने के बाद पानी को विंध्य क्षेत्र के उन इलाकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी जहां सिंचाई सुविधाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
1450 गांवों और लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ की उम्मीद
परियोजना से कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना समेत विंध्य क्षेत्र के कई हिस्सों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उपलब्ध रिपोर्टों में करीब 1450 गांवों और लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का उल्लेख किया गया है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद है।
17 साल से चल रहा है बड़ा प्रोजेक्ट
स्लीमनाबाद टनल परियोजना का सफर लंबा रहा है। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और निर्माण संबंधी चुनौतियों के कारण परियोजना को पूरा करने में कई साल लगे। अब टनल का अंतिम हिस्सा पूरा होने के करीब है, जिससे नर्मदा-सोन लिंक से जुड़ी सिंचाई व्यवस्था को आगे बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है।
खेती और ग्रामीण इलाकों के लिए क्यों अहम है यह सुरंग?
- विंध्य क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- करीब 1450 गांव परियोजना से लाभान्वित होने की उम्मीद है।
- बड़े कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य है।
- नर्मदा के पानी को लंबी दूरी तक पहुंचाने के लिए सुरंग महत्वपूर्ण कड़ी है।
- परियोजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है।
ध्यान देने वाली बात: अलग-अलग रिपोर्टों में परियोजना के लाभ क्षेत्र और समयसीमा के आंकड़ों में अंतर मिलता है। इसलिए अंतिम लाभ, पानी पहुंचने की तारीख और परियोजना की पूरी क्षमता का आकलन संबंधित सरकारी विभागों की अंतिम आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।
स्रोत: उपलब्ध मीडिया रिपोर्टें; आंकड़ों और परियोजना की स्थिति में आधिकारिक अपडेट के अनुसार बदलाव संभव है।

