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देवउठनी एकादशी 2026 कब है? तारीख, तुलसी विवाह और व्रत नियम

देवउठनी एकादशी 2026 तारीख और तुलसी विवाह
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

देवउठनी एकादशी 2026 शुक्रवार, 20 नवंबर को मनाई जाएगी। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 20 नवंबर को सुबह लगभग 7:16 बजे शुरू होकर 21 नवंबर को सुबह लगभग 6:32 बजे समाप्त होगी। वैष्णव परंपरा के कई अनुयायी यह व्रत अगले दिन, शनिवार 21 नवंबर को रखेंगे। इसी दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह जैसे शुभ कार्य फिर से शुरू होते हैं।

इस एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी और देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। नीचे तारीख, तुलसी विवाह, पारण और व्रत से जुड़ी ज़रूरी बातें आसान भाषा में दी गई हैं।

देवउठनी एकादशी 2026: तारीख और तिथि का समय

विवरणतारीख / समय (नई दिल्ली)
देवउठनी एकादशी व्रत (स्मार्त)शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
एकादशी तिथि प्रारंभ20 नवंबर 2026, सुबह लगभग 7:16 बजे
एकादशी तिथि समाप्त21 नवंबर 2026, सुबह लगभग 6:32 बजे
वैष्णव (गौण) एकादशीशनिवार, 21 नवंबर 2026
पारण (व्रत खोलना)अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद, हरि वासर समाप्त होने पर

ध्यान दें: तिथि का समय शहर के सूर्योदय के अनुसार बदलता है। महाराष्ट्र, मराठवाड़ा या विदेश में रहने वाले श्रद्धालु अपने शहर का स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुरोहित से समय ज़रूर मिला लें। तारीख की पुष्टि पंचांगबोध और देखो पंचांग जैसे पंचांग स्रोतों से की गई है।

देवउठनी एकादशी का महत्व: चातुर्मास का समापन

मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) को भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं और चार महीने बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान आमतौर पर विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे संस्कार टाले जाते हैं। देवउठनी एकादशी के साथ यह अवधि पूरी होती है, इसलिए इसे शुभ कार्यों की नई शुरुआत का दिन माना जाता है।

महाराष्ट्र में इसी दिन को कार्तिकी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है और पंढरपुर में विठ्ठल-रुक्मिणी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में वारकरी पहुंचते हैं।

तुलसी विवाह 2026 कब है?

तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु का स्वरूप) से कराया जाता है। परंपराएं अलग-अलग हैं:

  • कई परिवार एकादशी की शाम, यानी 20 नवंबर 2026 को तुलसी विवाह करते हैं।
  • कई जगह यह द्वादशी, यानी 21 नवंबर 2026 को होता है।
  • महाराष्ट्र समेत कई क्षेत्रों में एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी शुभ दिन तुलसी विवाह किया जाता है।

अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार दिन चुनें। घर पर तुलसी के गमले को साफ कर रंगोली, गन्ने का मंडप, दीपक और फूलों से सजाया जाता है।

व्रत के आम नियम और पूजा की तैयारी

  • एक दिन पहले: दशमी को सात्विक भोजन करें और रात में हल्का भोजन लें।
  • एकादशी के दिन: अनाज और चावल से परहेज़ किया जाता है। श्रद्धा और सेहत के अनुसार निर्जल, फलाहार या एक समय भोजन वाला व्रत रखा जाता है।
  • पूजा: भगवान विष्णु की पूजा, दीपदान, विष्णु सहस्रनाम या भजन-कीर्तन किया जाता है। कई घरों में शाम को शंख-घंटी बजाकर देवताओं को जगाने की परंपरा है।
  • पारण: अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद, स्थानीय पंचांग में दिए समय के अनुसार व्रत खोलें।
  • सेहत का ध्यान: गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग, डायबिटीज़ या अन्य बीमारी वाले लोग निर्जल व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

त्योहारों की तारीखों से जुड़ी हमारी और जानकारी: छठ पूजा 2026 की चारों दिन की तारीखें और नासिक सिंहस्थ कुंभ ध्वजारोहण की खबर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देवउठनी एकादशी 2026 में 20 नवंबर को है या 21 नवंबर को?

गृहस्थ (स्मार्त) परंपरा में व्रत 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। वैष्णव परंपरा के कई अनुयायी 21 नवंबर को व्रत रखेंगे।

देवउठनी एकादशी के बाद शादियां कब से शुरू होंगी?

परंपरागत रूप से चातुर्मास खत्म होने के बाद विवाह शुरू होते हैं, लेकिन विवाह का सटीक मुहूर्त पंचांग और ज्योतिषीय गणना पर निर्भर करता है। अपने पुरोहित से मुहूर्त निकलवाएं।

एकादशी व्रत का पारण कब करना चाहिए?

पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद और हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीतने के बाद किया जाता है। सही समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

क्या एकादशी पर चावल खा सकते हैं?

परंपरा के अनुसार एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे जैसी फलाहारी चीज़ें ली जाती हैं।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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