29 अक्टूबर 2026 — अजमेर शरीफ में सुल्तान-उल-हिंद हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती, ख्वाजा गरीब नवाज़ (रहमतुल्लाह अलैह) का 815वां सालाना उर्स इस साल दिसंबर 2026 में होगा। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक उर्स हर साल 1 से 6 रजब तक होता है। भारत में रजब 1448 हिजरी का चांद 10 दिसंबर की शाम दिखने की उम्मीद है, इसलिए अजमेर उर्स 2026 करीब 11 से 16 दिसंबर तक चलेगा और छठी शरीफ 16 दिसंबर को होने की संभावना है। अंतिम तारीखें चांद दिखने के बाद दरगाह की ओर से घोषित की जाएंगी। इस्लामिक खबरें

अजमेर उर्स 2026: एक नज़र में तारीखें
| रस्म / कार्यक्रम | इस्लामी तारीख | संभावित तारीख (भारत) |
|---|---|---|
| झंडे की रस्म (बुलंद दरवाज़ा) | 25 जमादिल आख़िर 1448 | रविवार, 6 दिसंबर 2026 के आसपास |
| रजब का चांद, जन्नती दरवाज़ा खुलेगा | 29/30 जमादिल आख़िर | 9 या 10 दिसंबर 2026 की शाम |
| उर्स की शुरुआत | 1 रजब 1448 | शुक्रवार, 11 दिसंबर 2026 के आसपास |
| छठी शरीफ और कुल | 6 रजब 1448 | बुधवार, 16 दिसंबर 2026 के आसपास |
| बड़ा कुल | 9 रजब 1448 | शनिवार, 19 दिसंबर 2026 के आसपास |
पिछले साल 814वां उर्स दिसंबर 2025 में हुआ था और छठी शरीफ 26–27 दिसंबर 2025 को थी। इस्लामी साल सौर साल से करीब 11 दिन छोटा होता है, इसलिए उर्स हर साल लगभग 11 दिन पहले आता है।
उर्स रजब में ही क्यों होता है?
“उर्स” का अर्थ है मिलन। सूफ़ी परंपरा में किसी वली के विसाल (इंतकाल) के दिन को उर्स कहा जाता है। ख्वाजा गरीब नवाज़ का विसाल 6 रजब 633 हिजरी (मार्च 1236 ईस्वी) को अजमेर में हुआ था। रिवायत है कि आख़िरी छह दिन वे अपने हुजरे में इबादत में रहे और छठे दिन उनका विसाल हुआ। इसी वजह से उर्स छह दिन चलता है और 6 रजब, यानी छठी शरीफ, सबसे अहम दिन है। 633 हिजरी से गिनें तो 1448 हिजरी का उर्स 815वां है।
उर्स की प्रमुख रस्में
- झंडे की रस्म: रजब से कुछ दिन पहले दरगाह के बुलंद दरवाज़े पर झंडा चढ़ाकर उर्स का ऐलान होता है।
- जन्नती दरवाज़ा: आम दिनों में बंद रहने वाला यह दरवाज़ा उर्स के दिनों में ज़ायरीन के लिए खोला जाता है।
- ग़ुस्ल: रजब की शुरुआत से मज़ार शरीफ को गुलाब जल और संदल से ग़ुस्ल देकर नई चादर पेश की जाती है।
- महफ़िल-ए-समा और क़व्वाली: महफ़िल ख़ाने और दरगाह के सहन में रात भर क़व्वाली होती है।
- बड़ी देग और छोटी देग: दो विशाल देगों में पका लंगर तबर्रुक के रूप में बांटा जाता है।
- चादर पेशी: देश-विदेश से ज़ायरीन चादर पेश करते हैं; हर साल प्रधानमंत्री की ओर से भी चादर भेजी जाती है।
- छठी शरीफ और कुल: 6 रजब को चिश्तिया सिलसिले का शजरा पढ़ा जाता है, दुआ होती है, क़व्वाल ताली बजाकर “बधावा” पढ़ते हैं, फ़ातिहा के बाद दोपहर करीब 1:30 बजे तोप दाग़कर कुल की रस्म पूरी होती है।
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कौन थे ख्वाजा गरीब नवाज़?
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1143 ईस्वी में सीस्तान (आज के ईरान-अफ़ग़ानिस्तान का इलाका) में हुआ। ख़ुरासान में इल्म हासिल करने के बाद वे ख्वाजा उस्मान हारूनी के मुरीद बने। 12वीं सदी के आख़िर में वे हिंदुस्तान आए और अजमेर में बस गए, जहां उन्होंने भारत में चिश्तिया सिलसिले की बुनियाद रखी। ग़रीबों की ख़िदमत और सबके लिए खुले लंगर की वजह से उन्हें “गरीब नवाज़”, यानी ग़रीबों को नवाज़ने वाला, कहा गया। उनके ख़लीफ़ा ख्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी, फिर बाबा फ़रीद और हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के ज़रिए यह सिलसिला पूरे उपमहाद्वीप में फैला। अंग्रेज़ी में पूरी जीवनी: Khwaja Gharib Nawaz: Life and Teachings।
उर्स में अजमेर जाने वालों के लिए ज़रूरी बातें
- ट्रेन (अजमेर जंक्शन) और ठहरने की बुकिंग जल्दी कराएं; उर्स के दौरान लाखों ज़ायरीन पहुंचते हैं और आम तौर पर विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं।
- भीड़ में अपने सामान का ध्यान रखें और पुलिस व दरगाह के स्वयंसेवकों के निर्देश मानें, ख़ासकर छठी शरीफ के दिन।
- दिसंबर में अजमेर की रातें ठंडी होती हैं, गर्म कपड़े साथ रखें।
- दरगाह में सिर ढककर जाएं; नमाज़ के लिए दरगाह परिसर में अकबरी मस्जिद और शाहजहानी मस्जिद हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अजमेर उर्स 2026 कब है?
ख्वाजा गरीब नवाज़ का 815वां उर्स करीब 11 से 16 दिसंबर 2026 (1–6 रजब 1448) तक होने की उम्मीद है। छठी शरीफ करीब 16 दिसंबर को होगी। तारीखें रजब के चांद पर निर्भर हैं।
2026 में ख्वाजा साहब का कौन सा उर्स है?
यह 815वां उर्स है। 813वां उर्स जनवरी 2025 में और 814वां दिसंबर 2025 में हुआ था।
छठी शरीफ क्या है?
6 रजब, ख्वाजा गरीब नवाज़ के विसाल का दिन, उर्स का सबसे अहम दिन है। इसे छठी शरीफ कहते हैं, और दोपहर में कुल की रस्म के साथ इसका समापन होता है।
स्रोत: Urs festival, Ajmer (Wikipedia)। अंग्रेज़ी में पूरा शेड्यूल: Ajmer Urs 2026 dates · Great Sufi Saints of India। दरगाह की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम घोषित होने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना
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