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E85 के साथ अब E100 भी: फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के नियमों में बदलाव

फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए E85 और E100 इथेनॉल ईंधन नियमों में बदलाव की जानकारी वाला हेडलाइन कार्ड
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026 — केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है, जिसमें फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन में E85 के साथ अब E100 ईंधन को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को पीआईबी के जरिए इसकी जानकारी दी।

सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना है। साथ ही मंत्रालय ने साफ किया है कि आम वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी बदलने या उसमें बदलाव कराने की कोई जरूरत नहीं है।

मुख्य बातें

  • केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी।
  • फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन में E85 के साथ E100 भी शामिल।
  • बायोडीजल से जुड़े प्रावधान भी अपडेट किए गए और कुछ तकनीकी सुधार किए गए।
  • नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू।
  • मौजूदा वाहन मालिकों के लिए E85 या E100 अपनाना अनिवार्य नहीं।

E85, E100 और फ्लेक्स फ्यूल वाहन क्या हैं

E85 पेट्रोल और इथेनॉल का वह मिश्रण है जिसमें मात्रा के हिसाब से 85 प्रतिशत तक इथेनॉल होता है, जबकि E100 में मुख्य रूप से इथेनॉल ही होता है। फ्लेक्स फ्यूल वाहन एक ही टंकी से अलग-अलग इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकते हैं। इनके ईंधन तंत्र के पुर्जे उसी हिसाब से बनाए जाते हैं और इंजन का कंट्रोल सिस्टम ईंधन के मिश्रण के अनुसार खुद को ढाल लेता है।

मंत्रालय के अनुसार ऐसे वाहनों को अपनी श्रेणी पर लागू उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा। वाहन मालिक निर्माता द्वारा प्रमाणित और घोषित सीमा के भीतर ही ईंधन चुन सकेंगे।

पुराने वाहन मालिकों के लिए जरूरी चेतावनी

सबसे अहम बात यह है कि E10 या E20 पर चलने वाली गाड़ियां अपने आप E85 के लिए उपयुक्त नहीं हैं। पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार इस ईंधन का उपयोग “केवल उन वाहनों में किया जा सकता है जिन्हें विशेष रूप से इसके लिए डिज़ाइन” और प्रमाणित किया गया है। इसलिए ईंधन भरवाने से पहले गाड़ी पर लगा फ्यूल कम्पैटिबिलिटी स्टिकर और ओनर मैनुअल जरूर देखें।

महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के लिए इसका मतलब

महाराष्ट्र देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में है और यहां की कई चीनी मिलें इथेनॉल भी बनाती हैं। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का रास्ता साफ होने से लंबे समय में इथेनॉल की मांग बढ़ सकती है, जिसका असर चीनी उद्योग और गन्ना किसानों तक पहुंच सकता है। हालांकि यह इस पर निर्भर करेगा कि बाजार में ऐसे वाहन कितने आते हैं और E85/E100 ईंधन की उपलब्धता कितनी बढ़ती है। सूखे के साल में पानी की कमी भी गन्ना उत्पादन पर असर डालती है, इसलिए इस पहलू पर भी नजर रखनी होगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या मेरी मौजूदा गाड़ी में E85 या E100 डल सकता है?
उत्तर: नहीं, जब तक निर्माता ने गाड़ी को इस ईंधन के लिए डिज़ाइन और प्रमाणित न किया हो। स्टिकर और मैनुअल देखें।

प्रश्न: क्या गाड़ी बदलना जरूरी है?
उत्तर: नहीं। मंत्रालय के अनुसार मौजूदा वाहन मालिकों पर कोई बाध्यता नहीं है।

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स्रोत / Source: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय — pib.gov.in


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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