जालना (प्रतिनिधि): जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराने वाले लोगों के लिए अब प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले से अधिक कठिन हो सकती है। केंद्र सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम 2026 के तहत देर से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। 6 अगस्त 2026 को प्रकाशित अधिनियम के अनुसार, दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
नए बदलाव का असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका जन्म या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु कई साल पहले हुई थी, लेकिन उस समय सरकारी रिकॉर्ड में उसका पंजीकरण नहीं हो पाया था।
पहले तहसीलदार के स्तर पर हो जाता था काम
जालना में अब तक देर से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने से जुड़े कई मामलों का काम तहसीलदार के स्तर पर हो जाता था। इससे लोगों को अपने इलाके में ही जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिलती थी और अदालत जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
नए नियम के बाद देरी की अवधि के आधार पर अलग-अलग अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होगी।
एक साल बाद और दो साल के अंदर पंजीकरण के लिए अधिकारी की मंजूरी
यदि जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल बीतने के बाद लेकिन दो साल के अंदर दी जाती है, तो संबंधित अधिकारी के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। इसके लिए जिलाधिकारी, उपविभागीय दंडाधिकारी या जिलाधिकारी की ओर से अधिकृत कार्यकारी दंडाधिकारी का आदेश जरूरी होगा। जन्म या मृत्यु की जानकारी सही होने की जांच और निर्धारित शुल्क का भुगतान भी जरूरी होगा।
दो साल से ज्यादा पुराने मामले में अदालत का आदेश जरूरी
नए नियम का सबसे बड़ा बदलाव दो साल से ज्यादा पुराने मामलों को लेकर है। यदि जन्म या मृत्यु की जानकारी दो साल से ज्यादा समय बाद दी जाती है, तो संबंधित क्षेत्र के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। आदेश देने से पहले जन्म या मृत्यु की जानकारी सही होने की जांच की जाएगी और निर्धारित शुल्क देना होगा।
इसका मतलब है कि कई साल पुराने जन्म या मृत्यु का रिकॉर्ड बनवाने वाले लोगों को अदालत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
पुराने प्रमाणपत्र बनवाने वालों की बढ़ सकती है परेशानी
जालना, बार्शी और मराठवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में पुराने जन्म प्रमाणपत्र बनवाने को लेकर कई लोगों को पहले से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ऐसे परिवारों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है, जिनके पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं या जिनका जन्म वर्षों पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ था।
अब ऐसे मामलों में अदालत का आदेश जरूरी होने के कारण लोगों को दस्तावेज जुटाने, आवेदन करने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ सकता है।
महेश धन्नावत बोले- लोगों को परेशानी से बचाने की कोशिश करेंगे
इस मामले में अधिवक्ता महेश धन्नावत ने कहा कि जालना में पहले ऐसे मामलों का काम तहसीलदार के स्तर पर हो जाता था, इसलिए आम लोगों के लिए प्रक्रिया आसान थी।
“अब दो साल से ज्यादा पुराने मामलों के लिए सीधे अदालत जाना पड़ेगा। इससे फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है, लेकिन आम लोगों को न्याय पाने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे।”
धन्नावत ने बताया कि वह अगले दो दिनों में वकील संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता परमेश्वर गाडगीळ और सचिव विनोद कुलकर्णी के साथ प्रमुख जिला न्यायाधीश से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही मराठवाड़ा पक्षकार संगठन के अध्यक्ष गोविंदप्रसाद मुंदडा और सचिव नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर संयुक्त ज्ञापन देने और प्रक्रिया को आसान तथा तेज बनाने की मांग की जाएगी।
नए नियम को आसान भाषा में समझें
- एक साल तक की देरी: तय प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण।
- एक साल से ज्यादा और दो साल के अंदर: जिलाधिकारी, उपविभागीय दंडाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी दंडाधिकारी के आदेश की जरूरत।
- दो साल से ज्यादा पुराना मामला: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण।
- जालना में असर: पुराने मामलों में अदालत की प्रक्रिया शामिल होगी।
आधिकारिक कानून की PDF यहां पढ़ें
पाठक Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 का आधिकारिक राजपत्र दस्तावेज यहां देख सकते हैं। यह अधिनियम 6 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ और इसमें धारा 13 में देर से जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।
📄 भारत सरकार का आधिकारिक e-Gazette PDF पढ़ें
नोट: ऊपर दिया गया लिंक सीधे भारत सरकार के e-Gazette पोर्टल पर उपलब्ध राजपत्र PDF को खोलता है।
राजपत्र संख्या: CG-DL-E-06082026-275249 | तारीख: 6 अगस्त 2026 | अधिनियम: Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026
महत्वपूर्ण: अधिनियम में कहा गया है कि यह केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना के जरिए तय की गई तारीख से लागू होगा। इसलिए स्थानीय स्तर पर नई प्रक्रिया लागू होने की तारीख के लिए संबंधित प्रशासन की सूचना देखना जरूरी है।
स्रोत: भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग)।

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