जालना: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटील की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। अनशन के चौथे दिन उनकी स्थिति को लेकर प्रशासन और समर्थकों की चिंता बढ़ गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक उनके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर कम हुआ है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए इलाज की जरूरत बताई है, लेकिन जरांगे पाटील ने मेडिकल जांच और उपचार लेने से इनकार किया है।
टीवी9 मराठी की 1 सितंबर सुबह 7:38 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार रात स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर जरांगे पाटील की जांच और उपचार करने की कोशिश की। टीम को दो बार प्रयास करना पड़ा, लेकिन दोनों बार जरांगे ने मेडिकल मदद स्वीकार नहीं की। रात करीब 1.15 बजे डॉक्टरों की टीम काफी देर तक जांच के लिए कोशिश करती रही, लेकिन उन्हें बिना जांच किए लौटना पड़ा। मेडिकल अधिकारियों ने उनके BP और शुगर में कमी की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी है।
लगातार उपवास से स्वास्थ्य पर असर
मनोज जरांगे पाटील ने 29 अगस्त 2026 से अंतरवाली सराटी में अपना 11वां अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया है। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। एबीपी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भी मेडिकल टीम ने उनकी जांच करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने चिकित्सकीय जांच से इनकार कर दिया। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए इलाज की सलाह दी है।
एशियानेट न्यूज मराठी की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि मेडिकल जांच के दौरान उनके रक्त में शुगर का स्तर कम पाया गया और डॉक्टर उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं। इन रिपोर्टों से साफ है कि लंबे उपवास के बीच उनकी स्वास्थ्य स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल भी पहुंचीं आंदोलन स्थल
मनोज जरांगे की तबीयत बिगड़ने के बीच जालना की जिलाधिकारी आशिमा मित्तल भी आंदोलन स्थल पर पहुंचीं। टीवी9 मराठी के मुताबिक, उन्होंने जरांगे पाटील से उनकी मांगों को लेकर चर्चा की। जिलाधिकारी ने बताया कि उनकी मांगों पर काफी काम चल रहा है, लेकिन जरांगे ने फिलहाल इलाज लेने से इनकार किया है। प्रशासन ने डॉक्टरों से उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की है।
क्या हैं मनोज जरांगे की प्रमुख मांगें?
जरांगे पाटील की मुख्य मांग मराठा समाज को कुनबी प्रमाणपत्र देकर ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ दिलाना है। इसके अलावा वे ‘सगे-सोयरे’ अधिसूचना को तुरंत लागू करने, मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने सहित अन्य मांगें उठा रहे हैं।
मुंबई पहुंचने की अपील, आंदोलन तेज करने की तैयारी
अनशन के तीसरे दिन जरांगे पाटील ने अपने समर्थकों से मुंबई पहुंचने की अपील की। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने समर्थकों को चरणबद्ध तरीके से मुंबई पहुंचने की रणनीति बताई है। उन्होंने सरकार को 12 सितंबर तक मांगों पर कार्रवाई करने का समय देने की बात भी कही है। इस बीच आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार बातचीत के लिए तैयार, लेकिन कानूनी दायरे पर जोर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध मांगों पर चर्चा के लिए तैयार है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी मराठा समाज को आरक्षण देने के पक्ष में सरकार की भूमिका बताई, लेकिन साथ ही कहा कि ऐसा करते समय दूसरे समुदायों के मौजूदा आरक्षण पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
दूसरी ओर, ओबीसी संगठनों और नेताओं की ओर से भी जरांगे की मांगों का विरोध किया जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में मराठा आरक्षण का मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से संवेदनशील होने की संभावना है।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वास्थ्य सुरक्षा
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल मनोज जरांगे पाटील की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर है। मेडिकल टीम इलाज की जरूरत बता रही है, जबकि जरांगे जांच और उपचार से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने एक तरफ आंदोलन और कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने और दूसरी तरफ उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखने की चुनौती है। उनकी सेहत को लेकर आगे आने वाली मेडिकल रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

यह खबर 1 सितंबर 2026 को उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर अपडेट की गई है। मनोज जरांगे पाटील की स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं।
