जालना: जालना शहर के मंठा रोड स्थित सर्वे नंबर 554 की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। पुलिस जांच के बाद इस मामले में अदालत के सामने ‘बी-फाइनल’ रिपोर्ट पेश की गई है। संध्या राजेंद्र डागा और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और साजिश जैसे आरोपों की जांच के बाद पुलिस को मामले में अपराध होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई है।
शुक्रवार, 4 सितंबर को संध्या डागा और उनके वकील एडवोकेट दीपक काकडे ने जालना के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी मीडिया के सामने रखी। उन्होंने कहा कि जमीन को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा था। उनके मुताबिक पुलिस जांच और अदालत में पेश की गई रिपोर्ट से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजेंद्र डागा, आशीष छाजेड़, सचिन अग्रवाल और वामन खेडेकर भी मौजूद थे।
2007 में मां ने बेटी को दी थी जमीन
संध्या डागा की ओर से बताया गया कि मंठा रोड पर सर्वे नंबर 554 में आबड परिवार की जमीन थी। इसी जमीन में से कुछ हिस्सा सुरजाबाई आबड ने वर्ष 2007 में अपनी बेटी संध्या डागा को दिया था। डागा परिवार के अनुसार इस जमीन को लेकर अंकित आबड और उनके परिवार की ओर से पहले भी अदालत में मामले ले जाए गए थे और उनके दावे अलग-अलग अदालतों में खारिज हुए हैं।
परिवार के अनुसार दिवानी अदालत से लेकर जिला अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जमीन से जुड़े मामलों में फैसले और आदेश सामने आ चुके हैं। इन्हीं न्यायिक फैसलों और सरकारी रिकॉर्ड को पुलिस जांच के दौरान भी जांच अधिकारी के सामने रखा गया।
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धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के लगाए गए थे आरोप
इस जमीन को लेकर कदीम जालना पुलिस थाने में संध्या डागा, उनके पति और अन्य लोगों के खिलाफ धारा 156(3) के तहत मामला दर्ज कराने की कार्रवाई की गई थी। शिकायत में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और साजिश रचने जैसे आरोप लगाए गए थे।
संध्या डागा के मुताबिक उन्होंने पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया। नोटिस मिलने के बाद वह थाने में उपस्थित हुईं और अपना लिखित पक्ष तथा बयान दर्ज कराया। जमीन से जुड़े अदालती फैसले, सरकारी आदेश और दूसरे आधिकारिक दस्तावेज भी जांच अधिकारी को उपलब्ध कराए गए।
जांच के बाद कोर्ट में दाखिल हुई ‘बी-फाइनल’ रिपोर्ट
एडवोकेट दीपक काकडे ने बताया कि पुलिस ने पूरे मामले की जांच करने के बाद अदालत के सामने ‘बी-फाइनल’ रिपोर्ट दाखिल की है। उनके मुताबिक जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों के अनुसार कोई अपराध हुआ होने की बात सामने नहीं आई।
काकडे के अनुसार जमीन से जुड़ा विवाद पहले अदालत और राजस्व विभाग की प्रक्रियाओं में सामने आ चुका था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विवाद को फौजदारी मामले का रूप देने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि ऐसी शिकायत के कारण पुलिस, अदालत और सरकारी व्यवस्था का समय और संसाधन बेवजह खर्च हुए।
जमीन बेचने से रोकने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप
डागा परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि जमीन की बिक्री रोकने के लिए लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। परिवार के मुताबिक संध्या डागा के जमीन पर कब्जे में रुकावट डालने और पहले से अदालत में चले आ रहे विवाद को आपराधिक मामले का रूप देने का प्रयास किया गया।
परिवार का कहना है कि जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और अदालतों के फैसले पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद नए आरोप लगाए जाने से विवाद और बढ़ गया।
‘मैंने जमीन मांगी नहीं थी, मां की इच्छा का सम्मान किया’
संध्या राजेंद्र डागा ने कहा कि उन्हें शुरू से इस जमीन की जरूरत नहीं थी, लेकिन मां की भावनाओं और आग्रह को देखते हुए उन्होंने जमीन स्वीकार की। उन्होंने कहा कि वह अपने हिस्से की जमीन भाइयों के बीच बांटने के लिए भी तैयार थीं। बाद में लगाए गए आरोपों के कारण मामला विवाद में बदल गया।
संध्या डागा ने कहा कि इन आरोपों की वजह से उन्हें और उनके परिवार को भारी मानसिक तनाव, सामाजिक परेशानी और बदनामी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में ‘बी-फाइनल’ रिपोर्ट पेश होने से उन्हें उम्मीद है कि वास्तविक स्थिति सबके सामने आएगी।
‘बहन-भाई का रिश्ता पहले जैसा हो’
संध्या डागा ने परिवार के बीच चल रहे विवाद को खत्म करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों को पुराने मतभेद भुलाकर फिर से साथ आना चाहिए। बहन-भाई के बीच का रिश्ता और आपसी प्यार पहले की तरह बना रहे, यही उनकी इच्छा है।
उन्होंने कहा कि जमीन और संपत्ति का विवाद परिवार के रिश्तों से बड़ा नहीं होना चाहिए और बातचीत के जरिए मामले को खत्म करने की कोशिश की जानी चाहिए।
मुख्य बातें एक नजर में
- सर्वे नंबर 554 की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद।
- संध्या डागा के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के आरोप लगाए गए थे।
- पुलिस ने मामले की जांच की।
- जांच के बाद अदालत में ‘बी-फाइनल’ रिपोर्ट दाखिल की गई।
- डागा परिवार के अनुसार अलग-अलग अदालतों में जमीन से जुड़े दावे पहले ही खारिज हो चुके हैं।
- संध्या डागा ने परिवार के बीच विवाद खत्म करने और रिश्ते सामान्य करने की अपील की।
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कानूनी स्थिति: ‘बी-फाइनल’ रिपोर्ट पर अंतिम फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में है। इस खबर में जमीन और पुलिस जांच से संबंधित दावे संबंधित पक्षों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए गए तथ्यों पर आधारित हैं।
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