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मनोज जरांगे का सरकार को अल्टीमेटम: पानी-सलाईन लेंगे, लेकिन उपोषण नहीं तोड़ेंगे; 12 सितंबर को मुंबई आने की चेतावनी

जालना/अंतरवाली सराटी: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का उपोषण जारी है। सरकार की ओर से बातचीत और उन्हें समझाने के प्रयासों के बीच जरांगे ने साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह पानी और सलाईन ले सकते हैं, लेकिन ठोस निर्णय होने तक उपोषण खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने सरकार को 11 सितंबर तक का समय देते हुए कहा है कि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो 12 सितंबर को मुंबई आने का फैसला लिया जा सकता है।

अंतरवाली सराटी में आंदोलन के सातवें दिन सरकार के प्रतिनिधियों ने जरांगे पाटील से मुलाकात कर आंदोलन खत्म करने की अपील की। हालांकि, बातचीत के बावजूद जरांगे अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं। उनका कहना है कि पानी या सलाईन लेना आंदोलन से पीछे हटना नहीं है और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

11 सितंबर तक सरकार को अल्टीमेटम

मनोज जरांगे पाटील ने सरकार को 11 सितंबर तक ठोस कार्रवाई करने का समय दिया है। उनका कहना है कि मराठा समाज की मांगों पर केवल आश्वासन देने के बजाय सरकार को स्पष्ट फैसला लेना होगा। यदि तय समय तक समाधान नहीं निकला तो 12 सितंबर को आंदोलन का अगला चरण शुरू करने की तैयारी की जाएगी।

पानी-सलाईन लेने पर भी उपोषण रहेगा जारी

लगातार उपोषण के कारण जरांगे पाटील की तबीयत को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसी बीच उन्होंने संकेत दिया है कि स्वास्थ्य को देखते हुए पानी या सलाईन लिया जा सकता है। लेकिन उनका कहना है कि इससे उपोषण समाप्त नहीं होगा। उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस और स्वीकार्य निर्णय नहीं लेती।

हैदराबाद गजटियर और कुनबी रिकॉर्ड का मुद्दा

मराठा आरक्षण आंदोलन में हैदराबाद गजटियर और पुराने सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र मराठा परिवारों को कुनबी प्रमाणपत्र देने का मुद्दा प्रमुख है। जरांगे पाटील की मांग है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया तेज की जाए। आंदोलन में बड़ी संख्या में पुराने रिकॉर्ड मिलने का दावा भी किया गया है और इन्हें आधार बनाकर प्रक्रिया लागू करने की मांग की जा रही है।

सातारा-कोल्हापुर और औंध गजटियर पर भी जोर

जरांगे की मांगों में सातारा-कोल्हापुर तथा औंध गजटियर से जुड़े रिकॉर्ड पर भी कार्रवाई शामिल है। उनका कहना है कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज जानकारी को ध्यान में रखते हुए पात्र लोगों के कुनबी प्रमाणपत्र और आरक्षण से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट नीति लागू करनी चाहिए।

आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग

मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी जरांगे पाटील लगातार उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को आंदोलन से जुड़े मामलों पर सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। इसके साथ ही मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को आसान बनाने और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी करने की मांग भी सामने रखी गई है।

सरकार के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत, लेकिन बात नहीं बनी

सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल ने अंतरवाली सराटी पहुंचकर जरांगे पाटील से बातचीत की। प्रतिनिधियों ने उन्हें स्वास्थ्य का हवाला देते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की। दूसरी ओर, जरांगे ने मांगों पर ठोस निर्णय के बिना पीछे हटने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरकार के सामने आंदोलन को लेकर समयबद्ध समाधान निकालने की चुनौती बनी हुई है।

12 सितंबर को मुंबई की ओर बढ़ सकता है आंदोलन

जरांगे पाटील की चेतावनी के मुताबिक 11 सितंबर तक सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं आया तो 12 सितंबर को मुंबई में आंदोलन का अगला चरण शुरू हो सकता है। इससे राज्य सरकार के सामने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ने की संभावना है।

अब सरकार के फैसले पर नजर

फिलहाल अंतरवाली सराटी में आंदोलन जारी है और सरकार की बातचीत की कोशिशों के बीच जरांगे अपनी मांगों पर कायम हैं। अब सबसे अहम सवाल यह है कि 11 सितंबर की समयसीमा से पहले सरकार कौन-सा ठोस फैसला लेती है। अगर सहमति नहीं बनती है तो 12 सितंबर को आंदोलन का रुख क्या होगा, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर रहेगी।

यह भी पढ़ें: मनोज जरांगे पाटील की तबीयत बिगड़ी, BP और शुगर में गिरावट

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है। घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है; नई जानकारी मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।


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Imran Siddiqui

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