महाराष्ट्र | सितंबर 2026
महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण का मुद्दा 2026 में फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 के State of Punjab v. Davinder Singh फैसले में राज्यों के लिए SC/ST श्रेणियों के भीतर उपवर्गीकरण की संवैधानिक संभावना को स्वीकार किया था। फैसले में अनुभवजन्य आधार और संवैधानिक सीमाओं के महत्व पर भी जोर दिया गया।
महाराष्ट्र में Badar Committee की भूमिका
महाराष्ट्र सरकार ने SC आरक्षण में उपवर्गीकरण के मुद्दे की जांच के लिए न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति बनाई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार समिति ने 16 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।
सुप्रीम कोर्ट का मूल फैसला: State of Punjab v. Davinder Singh — Supreme Court
इसके बाद क्या हुआ?
अप्रैल 2026 में राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आगे की प्रक्रिया के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया और संबंधित पक्षों से सुझाव तथा आपत्तियां लेने की प्रक्रिया शुरू की। उपलब्ध रिपोर्टों में सरकार की ओर से अलग-अलग पक्षों की बात सुनने की प्रक्रिया का भी उल्लेख है।
कौन-कौन से पक्ष क्या कहते हैं?
उपवर्गीकरण के समर्थक तर्क देते हैं कि SC आरक्षण के लाभ सभी समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंचे और अपेक्षाकृत पिछड़े समुदायों के लिए अधिक लक्षित हिस्सेदारी की जरूरत है। दूसरी ओर, विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि quota के भीतर नया बंटवारा सामाजिक एकता और मौजूदा अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। अंतिम नीति निर्णय राज्य सरकार की प्रक्रिया और उपलब्ध आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट का 2024 फैसला क्या कहता है?
सुप्रीम कोर्ट की सात-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि SC/ST के भीतर उपवर्गीकरण अपने-आप असंवैधानिक नहीं है। फैसले में यह भी महत्वपूर्ण है कि राज्य का कदम पर्याप्त अनुभवजन्य आधार और संवैधानिक सीमाओं के अनुरूप होना चाहिए।
महाराष्ट्र में SC समुदायों की आधिकारिक सूची
महाराष्ट्र के सामाजिक कल्याण विभाग की वेबसाइट पर राज्य में मान्य 59 अनुसूचित जातियों की आधिकारिक सूची उपलब्ध है। किसी भी आरक्षण संबंधी दावे की जांच के लिए सरकारी सूची को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।
आधिकारिक सूची: Maharashtra Social Welfare Department
सितंबर 2026 में स्थिति
सितंबर 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर महाराष्ट्र में SC उपवर्गीकरण पर प्रक्रिया और बहस जारी है। इसलिए किसी प्रस्ताव, समिति की सिफारिश या मांग को अंतिम लागू आरक्षण व्यवस्था मानना उचित नहीं होगा, जब तक राज्य सरकार की आधिकारिक अधिसूचना या अंतिम निर्णय सामने न आए।
नोट: आरक्षण और कानूनी मामलों में स्थिति बदल सकती है। पाठकों को अंतिम निर्णय के लिए महाराष्ट्र सरकार और न्यायालय के आधिकारिक दस्तावेज देखने चाहिए।
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