जालना, 5 नवंबर 2026 — बार-बार पड़ने वाले सूखे और पानी की किल्लत से सबक लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकों के हर गांव में कम से कम 100 जलशोषक गड्ढे (सोक पिट) बनाए जाएंगे. इसके साथ मिट्टी और जल संरक्षण के काम भी बड़े पैमाने पर शुरू होंगे.

सरकार का लक्ष्य है कि बारिश का हर बूंद पानी बहकर बेकार न जाए और जमीन में उतरे. इसके लिए खास कार्य योजना तैयार की गई है. घरों में इस्तेमाल होने वाला पानी और बारिश का पानी इन गड्ढों के जरिए सीधे जमीन में भेजा जाएगा.
जलशोषक गड्ढों के साथ पुराने स्रोतों को भी नई जान
इस मुहिम में सिर्फ नए काम ही नहीं, बल्कि पुराने जलस्रोतों को भी दोबारा काम का बनाया जाएगा:
- सीमेंट और मिट्टी के पुराने बांधों की मरम्मत
- स्थानीय तालाबों और बांधों में जमी गाद निकालना
- नालों को गहरा और चौड़ा करके पानी का बहाव सुधारना
- खेत तालाब, कुओं का पुनर्भरण और पत्थर के बांध
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सरकारी इमारतों और स्कूलों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सरकारी इमारतों, स्कूलों और ग्राम पंचायतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पर खास जोर रहेगा. छत पर गिरने वाला पानी सीधे जमीन में उतारने की तकनीक हर जगह पहुंचाने की योजना है.
पैसा कहां से आएगा, गांवों को क्या फायदा
इस मुहिम के लिए फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी. काम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जिला योजना निधि, विधायक और सांसद स्थानीय विकास निधि तथा CSR जैसे स्रोतों के पैसे से किए जाएंगे.
इन कामों से सूखा प्रभावित गांवों में पानी की समस्या काफी हद तक हल होने की उम्मीद है. साथ ही ग्रामीणों और खेतिहर मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिलेगा, जिससे काम की तलाश में होने वाला पलायन रुकेगा. भूजल स्तर बढ़ने का सीधा फायदा खेती को भी होगा.
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न्यूज़ नेशन ऑनलाइन डेस्क
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