PM Modi ने एक बार फिर सोशल मीडिया के माध्यम से देश के युवाओं को संबोधित किया। इंस्टाग्राम पर साझा वीडियो में उन्होंने कहा कि आज उनका मन केवल युवाओं से बात करने का है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे देश और दुनिया ने देखा कि कुछ युवाओं ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी दिवंगत माता के लिए भी अपमानजनक शब्द कहे गए।
गुस्से के बजाय सुधार की बात: PM Modi
PM Modi ने कहा कि बचपन और युवावस्था में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन हर गलती के बाद सुधार का अवसर भी होना चाहिए। उन्होंने माना कि समाज में इस घटना को लेकर आक्रोश और सांस्कृतिक झटका महसूस किया जा रहा है, खासकर जब बेटियों द्वारा इस तरह की भाषा सुनने को मिली। इसके बावजूद उन्होंने लोगों से संयम बरतने और युवाओं को समझाने की अपील की।
“ये गुमराह बच्चे हैं”: PM Modi
अपने संबोधन में PM Modi ने कहा कि इन बच्चों को गुमराह कहना ज्यादा उचित होगा। उनके अनुसार, समाज की जिम्मेदारी उन्हें सही दिशा दिखाने की है, न कि केवल दंड देने की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालतों के चक्कर कटवाने या सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि संवाद और मार्गदर्शन से सकारात्मक बदलाव संभव है।
दांत और जीभ का उदाहरण
PM Modi ने अपनी बात समझाने के लिए एक भावनात्मक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी दांतों के बीच जीभ आ जाने से खून निकल आता है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते, क्योंकि दांत और जीभ दोनों हमारे अपने हैं। उसी तरह देश के बच्चे भी हमारे ही हैं और उन्हें सुधारना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
युवाओं से भविष्य निर्माण की अपील
अपने संदेश के अंत में PM Modi ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गलतियों से सीखें और देश के विकास की यात्रा में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश के युवाओं का उज्ज्वल भविष्य ही उनका सबसे बड़ा सपना है। उन्होंने सभी से मिलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश केवल एक विवाद पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी सामने रखता है। उन्होंने दंड की बजाय संवाद, नाराजगी की बजाय मार्गदर्शन और टकराव की बजाय सुधार पर जोर देते हुए समाज से युवाओं को अवसर देने की अपील की। यह संदेश इस बात की याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें सही दिशा देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
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