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समय से पहले उड़ान भरना टाटा एयरलाइंस को पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग ने 50 हजार रुपये मुआवजे का दिया आदेश

टाटा एयरलाइंस

बिना पूर्व सूचना उड़ान रवाना करने पर आयोग की सख्त टिप्पणी, टिकट राशि ब्याज सहित लौटाने और कानूनी खर्च देने के भी निर्देश

जालना | प्रतिनिधि

हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों को समय पर सूचना देना एयरलाइंस कंपनियों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। यदि कोई एयरलाइन बिना पूर्व सूचना दिए उड़ान का समय बदल देती है और इससे यात्रियों को आर्थिक या मानसिक नुकसान होता है, तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

इसी सिद्धांत को मजबूत करते हुए चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में टाटा एसआईए एयरलाइंस लिमिटेड (विस्तारा) को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग ने एयरलाइन को पीड़ित यात्री को 50,000 रुपये मुआवजा, 15,000 रुपये मुकदमे का खर्च तथा टिकट की पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है।

इस फैसले का स्वागत करते हुए नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश एस. धन्नावत ने कहा कि यह निर्णय देशभर के उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला मील का पत्थर साबित होगा।


क्या है पूरा मामला?

मामले के शिकायतकर्ता आयुष बंसल ने टाटा एसआईए एयरलाइंस के माध्यम से चंडीगढ़–दिल्ली–बाली (डेनपसार) मार्ग की आने-जाने की हवाई टिकट बुक कराई थी।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उन्हें 2 अप्रैल 2024 को इंडोनेशिया के डेनपसार (बाली) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत लौटना था।

जब वे निर्धारित समय पर एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनकी उड़ान पहले ही रवाना हो चुकी है। सबसे गंभीर बात यह रही कि एयरलाइन की ओर से उड़ान का समय बदले जाने की कोई ई-मेल, एसएमएस या अन्य पूर्व सूचना उन्हें नहीं दी गई थी।

इस लापरवाही के कारण उन्हें विदेश में फंसना पड़ा और भारत लौटने के लिए मजबूरन लगभग 51,000 रुपये खर्च कर नई टिकट खरीदनी पड़ी।

इतना ही नहीं, भारत पहुंचने में हुई देरी के कारण उनकी दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट भी छूट गई, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलना पड़ा।


आयोग ने एयरलाइन की सेवा को माना दोषपूर्ण

मामले की सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्पष्ट कहा कि उड़ान के समय में बदलाव होने पर यात्रियों को समय रहते इसकी जानकारी देना एयरलाइन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एयरलाइन इस मूलभूत दायित्व का पालन करने में पूरी तरह विफल रही, जिसके कारण शिकायतकर्ता को विदेश में गंभीर असुविधा, मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

आयोग ने यह भी माना कि जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पहले दिया गया 7,000 रुपये का मुआवजा वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद कम था।


50 हजार रुपये मुआवजा, टिकट राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश

राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राज शेखर अत्री तथा सदस्य प्रीतिंदर सिंह की पीठ ने जिला आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए एयरलाइन को निम्न आदेश दिए—

  • शिकायतकर्ता को 50,000 रुपये मानसिक एवं आर्थिक क्षति का मुआवजा दिया जाए।
  • मुकदमे के खर्च के रूप में 15,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएं।
  • टिकट की मूल राशि 58,641 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस की जाए।
  • यदि आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर नहीं किया गया तो बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

आयोग ने कहा कि सेवा प्रदाता कंपनियों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को नहीं भुगतना चाहिए।


उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी जीत: एड. महेश एस. धन्नावत

फैसले का स्वागत करते हुए नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश एस. धन्नावत ने कहा कि यह निर्णय देशभर के यात्रियों और उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों को हल्के में नहीं ले सकतीं। यदि किसी सेवा में लापरवाही के कारण उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान और मानसिक पीड़ा होती है तो उसकी उचित भरपाई करना संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला अन्य उपभोक्ताओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, सेवा प्रदाता कंपनियां भी भविष्य में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ काम करने को मजबूर होंगी।


उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक यात्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लाखों हवाई यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो एयरलाइंस कंपनियों की लापरवाही से प्रभावित होते हैं।

यदि किसी एयरलाइन द्वारा बिना पूर्व सूचना उड़ान रद्द या समय में बदलाव किया जाता है और इससे यात्री को नुकसान होता है, तो वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मुआवजे का दावा कर सकता है।


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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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