फ्लाइट रद्द होने पर यात्रियों को बड़ी राहत
एयरलाइन और ट्रैवल एजेंट दोनों पर 1 लाख रुपये मुआवजे का आदेश, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
चंडीगढ़/नई दिल्ली :
हवाई यात्रियों के अधिकारों को मजबूती देने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एयरलाइन कंपनियों और ट्रैवल एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करते हुए बड़ा आदेश दिया है। आयोग ने कहा है कि यदि किसी यात्री को फ्लाइट रद्द होने की पूर्व सूचना नहीं दी जाती है, तो इसके लिए एयरलाइन और टिकट बुकिंग एजेंट दोनों समान रूप से जिम्मेदार होंगे।
आयोग ने पीड़ित यात्री को 1 लाख रुपये का मुआवजा, अतिरिक्त टिकट खर्च की वापसी तथा कानूनी खर्च देने का आदेश सुनाया है। उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञ इस फैसले को यात्रियों के हित में ऐतिहासिक निर्णय मान रहे हैं।
बिना सूचना रद्द हुई फ्लाइट, यात्री को उठानी पड़ी परेशानी
यह मामला यात्री सोहिल भसीन से जुड़ा है। उन्होंने नई दिल्ली से शारजाह जाने के लिए Air India की फ्लाइट का टिकट Alhind Tours and Travels के माध्यम से बुक कराया था।
20 मई 2022 को वह तय समय पर एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें पता चला कि उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई है। सबसे गंभीर बात यह रही कि उन्हें इस संबंध में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी।
फ्लाइट रद्द होने के कारण उन्हें अगले दिन की दूसरी उड़ान के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च कर नया टिकट खरीदना पड़ा। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उनकी महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठक भी प्रभावित हुई। यात्री ने मानसिक तनाव और असुविधा को लेकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
जिला आयोग ने केवल एजेंट को माना था दोषी
शुरुआत में जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में केवल ट्रैवल एजेंट को जिम्मेदार ठहराया था और एयर इंडिया को राहत दे दी थी।
हालांकि, बाद में चंडीगढ़ राज्य आयोग ने इस फैसले को पलटते हुए एयरलाइन और ट्रैवल एजेंट दोनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार माना। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यात्रियों को सेवा उपलब्ध कराना एयरलाइन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और उड़ान रद्द होने की जानकारी समय पर देना उसकी जवाबदेही का हिस्सा है।
आयोग ने स्पष्ट कहा कि एयरलाइन केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कि सूचना देने का काम एजेंट का था। टिकट बुकिंग प्रक्रिया में एयरलाइन और एजेंट दोनों सेवा श्रृंखला का हिस्सा होते हैं, इसलिए यात्री को हुई असुविधा के लिए दोनों जिम्मेदार हैं।
30 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया मुआवजा
राज्य आयोग ने जिला आयोग द्वारा निर्धारित 30 हजार रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए उसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया।
इसके अलावा आयोग ने यात्री द्वारा नए टिकट पर खर्च किए गए 6,075 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने तथा 35 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने का भी आदेश दिया।
हालांकि आयोग ने यात्री द्वारा किए गए व्यावसायिक नुकसान के दावे को स्वीकार नहीं किया। आयोग का कहना था कि यात्री उसी दिन उपलब्ध किसी अन्य उड़ान से यात्रा कर नुकसान को कम करने का प्रयास कर सकते थे।
यात्रियों के अधिकारों को मजबूती देने वाला फैसला
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष महेश एस. धन्नावत ने कहा कि यह निर्णय देशभर के हवाई यात्रियों के लिए बेहद राहतभरा है।
उन्होंने कहा कि अक्सर एयरलाइन कंपनियां और ट्रैवल एजेंट एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर यात्रियों को परेशान करते हैं, लेकिन इस फैसले से ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी।
उन्होंने महाराष्ट्र और विशेष रूप से जालना के लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी सेवा में लापरवाही होती है, तो उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए और उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में एयरलाइन कंपनियों और ट्रैवल एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में मिसाल बनेगा। इससे यात्रियों को यह संदेश गया है कि यदि उन्हें सेवा में लापरवाही का सामना करना पड़ता है, तो वे कानूनी रूप से न्याय प्राप्त कर सकते हैं।
यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने के साथ-साथ सेवा प्रदाताओं को भी अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी बनने के लिए मजबूर करेगा।
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