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जालना में शिक्षकों का आंदोलन: टीईटी, पदोन्नति और बीएलओ ड्यूटी पर विरोध

Group of people in formal attire gathered around a conference desk for a signing ceremony in an office setting, facing the camera.

जालना | News Nation Online

महाराष्ट्र के जालना जिले में गुरुवार को शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश आंदोलन किया। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता, पदोन्नति नियमों में संशोधन, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति तथा पुरानी पेंशन योजना सहित विभिन्न मांगों को लेकर जिले के सरकारी, अनुदानित और निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

इस आंदोलन का सीधा असर जिले के कई विद्यालयों में देखने को मिला। अधिकांश स्कूल खुले रहे, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामूहिक अवकाश पर रहने के कारण नियमित कक्षाएं प्रभावित हुईं और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित रही।

कलेक्टर कार्यालय के सामने दो घंटे तक धरना

दोपहर करीब चार बजे जिले के विभिन्न तालुकों और शहरों से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक जालना जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने एकत्र हुए। शिक्षकों ने लगभग दो घंटे तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

प्रदर्शन के बाद शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिला कलेक्टर रमेश मिसाल को ज्ञापन सौंपते हुए राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने तथा लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की।

पदोन्नति नियमों पर शिक्षकों की नाराजगी

ज्ञापन में शिक्षकों ने कहा कि वर्तमान पदोन्नति नीति के कारण वर्षों से सेवा दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। उन्होंने मांग की कि 14 मई 2026 को शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश के आधार पर शुरू की गई शिक्षा विस्तार अधिकारी, संकुल प्रमुख (क्लस्टर हेड) और प्रधानाध्यापक पदों की पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल स्थगित किया जाए।

शिक्षकों का कहना है कि नई पदोन्नति नीति लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाए और वरिष्ठता, अनुभव तथा सेवा अवधि को उचित महत्व देते हुए नई नीति तैयार की जाए।

वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने की मांग

आंदोलनकारी शिक्षकों ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है। ऐसे शिक्षक वर्षों से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उनकी आयु, अनुभव और स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार को विशेष नीति बनानी चाहिए।

  • तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना की तर्ज पर वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।
  • यदि पूर्ण छूट संभव न हो तो वरिष्ठ शिक्षकों के लिए अलग पात्रता नियम बनाए जाएं।
  • टीईटी में 40 प्रतिशत अंक को उत्तीर्ण मानदंड माना जाए।
  • जिस स्तर की कक्षाओं में शिक्षक पढ़ा रहे हैं, उसी स्तर के अनुरूप अलग पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए।
  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पात्र वरिष्ठ शिक्षकों को न्यायसंगत अवसर प्रदान किए जाएं।

बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने की मांग

ज्ञापन में कहा गया कि चुनाव संबंधी कार्यों के लिए प्राथमिक शिक्षकों की लगातार बीएलओ (Booth Level Officer) के रूप में नियुक्ति की जाती है। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक दबाव पड़ता है तथा विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। इसलिए प्राथमिक शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए।

अन्य प्रमुख मांगें

  • उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के आदेश के अनुसार जालना जिले के सभी पात्र प्राथमिक स्नातक शिक्षकों को स्नातक वेतनमान दिया जाए।
  • विशेष बस्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की पूर्व सेवा को मान्यता देकर उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
  • सभी पदोन्नतियां वरिष्ठता, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया के आधार पर की जाएं।
  • सेवा में कार्यरत वरिष्ठ शिक्षकों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों की भागीदारी

आंदोलन में जिले के विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। ज्ञापन पर मधुकर काकड़े, संतोष राजगुरु, देवेंद्र बारगेजे, बबनराव बोरुडे, दीपक दराडे, उद्धव पवार, सुभाष म्हस्के, रघुनाथ वाघमारे, संजय हेरकर, उद्धव बिल्हारे, जावेद खान, पंडितराव लव्हटे, सुभाष भडांगे, जगत घुगे, विकास पोतरे, अब्दुल्ला चौस, गणेश खेडकर, प्रशांत आष्टीकर, आर.बी. गोल्डे, श्रीराम दलवी, नागेश काकड़े, बाबासाहेब कडोस, श्रीहरी विष्णु, एन.एस. बर्वे, आर.टी. जिगे, दिगंबर गाडेकर, मनोहर साबले, बी.के. लोखंडे, शेख मोहसीन, संदीप सोलंके, एस.जे. घाडगे, प्रधान आढे, चंद्रकांत हजारे, ए.के. कुलकर्णी, डी.एल. पवार तथा ए.आर. तोंडे सहित अनेक शिक्षक नेताओं के हस्ताक्षर हैं।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान आवश्यक है।


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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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