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डीजल संकट से जालना के किसान परेशान, भीषण गर्मी में घंटों लाइन में इंतजार

लोग इंडियनऑयल पेट्रोल पंप के बाहर डीज़ल के लिए लंबी कतार में खड़े हैं, हर एक के हाथ में जेर्री कैन।

डीजल संकट ने बढ़ाई किसानों की परेशानी, भीषण गर्मी में घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर

खेती के मौसम में ईंधन के लिए संघर्ष, दस्तावेजों की प्रक्रिया से किसान परेशान

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जालना : खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच जालना जिले में डीजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। खेतों में जुताई, पूर्व मशागत और बुवाई की तैयारी का समय शुरू हो चुका है, लेकिन किसानों को खेती के काम से ज्यादा संघर्ष अब डीजल हासिल करने के लिए करना पड़ रहा है। जिले के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर डीजल की कमी के कारण लंबी कतारें लग रही हैं और किसान भीषण गर्मी में घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

विशेष रूप से बदनापुर क्षेत्र स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर स्थिति अधिक गंभीर दिखाई दे रही है। यहां सुबह से लेकर देर रात तक किसानों की भीड़ लगी रहती है। तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद किसान हाथों में डीजल के कैन लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि वे सुबह से बिना भोजन और पानी के लाइन में खड़े रहते हैं ताकि किसी तरह खेती के लिए आवश्यक ईंधन मिल सके।

खरीफ सीजन पर संकट के बादल

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खरीफ खेती मुख्य रूप से समय पर बारिश और खेती की प्रारंभिक तैयारियों पर निर्भर करती है। ऐसे समय में डीजल की कमी किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है। ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन के लिए डीजल बेहद जरूरी है। यदि समय पर खेतों की जुताई नहीं हुई तो बुवाई का पूरा चक्र प्रभावित हो सकता है।

किसानों का कहना है कि पहले ही खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद और मजदूरी के खर्च ने किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है। अब डीजल संकट ने उनकी परेशानियों में और इजाफा कर दिया है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें बार-बार पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

खेती और कृषि संबंधी खबरों के लिए पाठक हमारी कृषि श्रेणी भी देख सकते हैं :
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डीजल लेने के लिए पूरी करनी पड़ रही औपचारिकताएं

डीजल प्राप्त करने के लिए किसानों को कई दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ रहे हैं। पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा ट्रैक्टर की आरसी बुक, किसान पहचान पत्र, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर मांगा जा रहा है। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया डीजल की कालाबाजारी रोकने के लिए लागू की गई है, लेकिन किसानों का कहना है कि इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

लाइन में लगे कई किसानों ने बताया कि दस्तावेजों की जांच और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है। एक किसान ने कहा कि “हम खेती छोड़कर पूरा दिन डीजल के लिए लाइन में बिताने को मजबूर हैं। अगर यही स्थिति रही तो खेत की तैयारी समय पर नहीं हो पाएगी।”

रात से ही पेट्रोल पंपों पर जुट रहे किसान

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई किसान और ट्रैक्टर चालक रात से ही पेट्रोल पंपों के बाहर पहुंचकर लाइन लगा रहे हैं। कुछ किसान तो डीजल टैंकर आने से पहले ही अपने कैन लेकर कतार में खड़े हो जाते हैं ताकि उन्हें डीजल मिल सके।

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से डीजल की मांग अचानक बढ़ गई है। खरीफ सीजन शुरू होने के कारण ट्रैक्टरों का उपयोग बढ़ा है, जबकि आपूर्ति सीमित होने से संकट गहरा गया है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं।

डीजल और पेट्रोल की कीमतों से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए पाठक Indian Oil Corporation और Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की वेबसाइट भी देख सकते हैं।

अंबड क्षेत्र में अवैध डीजल बिक्री पर प्रशासन की कार्रवाई

डीजल संकट के बीच कुछ लोग अवैध रूप से डीजल और पेट्रोल का भंडारण कर ऊंचे दामों पर बेचने में जुट गए हैं। इस पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अंबड तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में राजस्व और आपूर्ति विभाग की टीम ने छापेमारी अभियान चलाकर करीब 100 लीटर अवैध डीजल जब्त किया है।

प्रशासन को सूचना मिली थी कि कुछ लोग बिना अनुमति के ईंधन का भंडारण कर रहे हैं और बाद में किसानों को अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। इसके बाद अधिकारियों ने कई स्थानों पर जांच अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से संग्रहित डीजल बरामद किया गया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध भंडारण और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों ने पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार ही ईंधन वितरण करें।

किसानों ने सरकार से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

किसानों और कृषि संगठनों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही डीजल की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कई किसानों ने यह भी मांग की है कि कृषि कार्यों के लिए अलग से डीजल कोटा निर्धारित किया जाए ताकि खेती के मौसम में उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े। किसानों का कहना है कि खेती का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और कुछ दिनों की देरी भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है।

लगातार बढ़ रही है चिंता

जालना जिले में बढ़ता डीजल संकट अब केवल ईंधन की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों की आजीविका और खेती से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। भीषण गर्मी, लंबी कतारें और सीमित आपूर्ति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो आने वाले दिनों में खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।

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जालना डीजल संकट


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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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