13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले से लेकर प्रत्यर्पण तक: जानिए ईडी के सबसे चर्चित नीरव मोदी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की पूरी कहानी
सीए. गोविंदप्रसाद मुंदड़ा एवं सीए. डॉ. आकाश मुंदड़ा की विशेष श्रृंखला ‘आसान भाषा में इनकम टैक्स और निवेश’ (भाग-5)
जालना | प्रतिनिधि
देश के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में शामिल नीरव मोदी मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी मामला एक बार फिर चर्चा में है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े लगभग 13,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।
सीए. गोविंदप्रसाद एस. मुंदड़ा एवं सीए. डॉ. आकाश जी. मुंदड़ा द्वारा लिखित लोकप्रिय शैक्षणिक श्रृंखला “आसान भाषा में इनकम टैक्स और निवेश” के पांचवें भाग में ईडी द्वारा जांचे जा रहे इस बहुचर्चित मामले को सरल प्रश्नोत्तर शैली में समझाया गया है।
नीरव मोदी कौन हैं?
नीरव दीपक मोदी का जन्म गुजरात के पालनपुर में हुआ था। उनका परिवार वर्षों से हीरे के कारोबार से जुड़ा रहा, जिसके कारण बाद में परिवार बेल्जियम के एंटवर्प शहर में जाकर बस गया।
अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद नीरव मोदी भारत लौटे और मुंबई में अपने मामा मेहुल चोकसी के आभूषण व्यवसाय से जुड़े। कुछ वर्षों के अनुभव के बाद उन्होंने वर्ष 1999 में अपनी कंपनी फायरस्टार डायमंड की स्थापना की।
इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई और भारत, न्यूयॉर्क, हांगकांग सहित कई देशों में लग्जरी ज्वेलरी स्टोर शुरू किए। वर्ष 2013 में उनका नाम फोर्ब्स की भारतीय अरबपतियों की सूची में भी शामिल हुआ।
हालांकि, बाद में बैंकिंग प्रणाली में कथित धोखाधड़ी के आरोप सामने आने के बाद उनका कारोबारी साम्राज्य विवादों में घिर गया और वे देश छोड़कर विदेश चले गए।
आखिर क्या है पूरा बैंक घोटाला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, नीरव मोदी और उनके सहयोगियों पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की कुछ शाखाओं से फर्जी बैंक गारंटी (Letters of Undertaking – LoU) के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने का आरोप है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) तथा अन्य वित्तीय जांच एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग, बैंक धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों की जांच कर रही हैं।
नीरव मोदी पर कितना बकाया है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार नीरव मोदी पर 13,000 करोड़ रुपये से अधिक (लगभग 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर) का बकाया विभिन्न बैंकों का है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा पंजाब नेशनल बैंक से जुड़ा बताया जाता है।
हाल ही में लंदन हाईकोर्ट ने भी एक मामले में नीरव मोदी को उनकी दुबई स्थित कंपनी के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर बैंक ऑफ इंडिया को लगभग 108 करोड़ रुपये (करीब 10.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर) चुकाने का आदेश दिया है।
क्या नीरव मोदी गिरफ्तार हो चुके हैं?
जी हां।
नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे दक्षिण लंदन स्थित वैंड्सवर्थ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
15 अप्रैल 2021 को तत्कालीन ब्रिटिश गृह मंत्री प्रीति पटेल ने उनके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।
इसके बाद नीरव मोदी ने ब्रिटेन की विभिन्न अदालतों में प्रत्यर्पण रोकने के लिए कई याचिकाएं दायर कीं, लेकिन अधिकांश कानूनी प्रयास असफल रहे।
लेख के अनुसार जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनके प्रत्यर्पण को रोकने के लगभग सभी प्रमुख कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं।
ईडी की सबसे चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग जांच
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, बैंक धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों से जुड़े सबसे बड़े मामलों में गिना जाता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लगातार इस मामले में अवैध संपत्तियों की जब्ती, धन के स्रोत और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहा है।
क्या सीख मिलती है इस मामले से?
चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए. गोविंदप्रसाद एस. मुंदड़ा एवं सीए. डॉ. आकाश जी. मुंदड़ा का कहना है कि यह मामला बताता है कि बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और नियामकीय निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।
साथ ही, आर्थिक अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कानूनी कार्रवाई संभव है और ऐसे मामलों में वर्षों बाद भी न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।
लेखक परिचय
सीए. गोविंदप्रसाद एस. मुंदड़ा
सीए. डॉ. आकाश जी. मुंदड़ा
जालना

