संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा प्रस्तावित संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। घटनास्थल पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। इसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस ने कार्रवाई की। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े कई वीडियो भी सामने आए हैं।
CJP ने कार्रवाई पर जताई आपत्ति
घटना के बाद CJP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। पार्टी ने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया और अपने विरोध को शांतिपूर्ण बताया। हालांकि, इन दावों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने कहा- मार्च की अनुमति नहीं थी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, संसद मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई थी और न ही स्वीकृति दी गई थी। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण सार्वजनिक जमावड़े और जुलूस पर प्रतिबंध प्रभावी था। डीसीपी सचिन शर्मा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार का विरोध मार्च आयोजित नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा के चलते कई मेट्रो स्टेशन बंद
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों से राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने की घोषणा की। इसके अलावा संसद मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई तथा अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
संसद सत्र और प्रदर्शन दोनों पर देश की नजर
एक ओर संसद के भीतर महत्वपूर्ण विधायी कार्य शुरू हो चुके हैं, वहीं दूसरी ओर संसद के बाहर जारी विरोध प्रदर्शन भी राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति, संसद की कार्यवाही और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।
दिल्ली में मॉनसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन दोनों ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। फिलहाल प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। आगे की स्थिति पुलिस, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाले संवाद तथा आगामी घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
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