जंतर-मंतर विवाद में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का एक और वीडियो चर्चा में; आत्मरक्षा का दावा, बाद में बुलंदशहर से दिल्ली पुलिस ने लिया हिरासत में
नई दिल्ली/बुलंदशहर: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। एक वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर कहते नजर आ रहे हैं कि राहुल गांधी या पूरा विपक्ष भी उनके खिलाफ आ जाए, तब भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्होंने ट्रंप और नेतन्याहू का नाम लेते हुए भी इसी तरह की चुनौती दी।
‘मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता’
पत्रकारों से बातचीत में स्वतंत्र भारद्वाज ने खुद को बेफिक्र बताते हुए कहा कि राहुल गांधी या पूरा विपक्ष उनके खिलाफ आ जाए, तब भी उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसी दौरान उन्होंने ट्रंप और नेतन्याहू का नाम लेते हुए भी चुनौती भरे अंदाज में बयान दिया।
वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर अपने प्रभाव को लेकर दावा करते सुनाई दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जंतर-मंतर की घटना पर आत्मरक्षा का दावा
स्वतंत्र भारद्वाज पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार के साथ कथित मारपीट का आरोप है। भारद्वाज ने अपने पक्ष में घटना को आत्मरक्षा बताया है। उनका दावा है कि यदि उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी होती तो भीड़ उन्हें नुकसान पहुंचा सकती थी। यह उनका पक्ष है और मामले की जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
पॉडकास्ट के बयान पर भी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद सामने आए एक पॉडकास्ट को लेकर भी भारद्वाज ने सफाई दी है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कपिल मिश्रा और चिराग पासवान से संबंधित अपने बयान को व्यंग्य बताया और दोनों को अपने भाइयों जैसा बताया।
बुलंदशहर से पुलिस हिरासत में
4 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। यह कार्रवाई जंतर-मंतर मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।
मामले की जांच जारी
मामले में पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। वायरल वीडियो और आरोप-प्रत्यारोप के बीच कानूनी रूप से दोष सिद्ध होने तक स्वतंत्र भारद्वाज को आरोपी के रूप में ही संबोधित किया जाना चाहिए।
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डिस्क्लेमर: इस खबर में आरोपों और बयानों को उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संबंधित पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जहां उपलब्ध नहीं है, वहां उन्हें दावे के रूप में ही रखा गया है।

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