नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR और आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत दी है।
छात्रों के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया। अदालत के आदेश से उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के कारण FIR और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा था।
दिल्ली समेत कई राज्यों के छात्रों को राहत
रिपोर्टों के अनुसार राहत का दायरा दिल्ली के साथ बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में दर्ज छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों तक है। अदालत ने संबंधित मामलों को आगे बढ़ाने पर रोक लगाते हुए उन्हें समाप्त करने का निर्देश दिया।
5 सितंबर का दिल्ली मार्च भी टला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और सरकार के आश्वासन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लेने की घोषणा की है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट में इसकी जानकारी दी। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना था।
छात्रों की आवाज को मिली बड़ी सफलता
छात्र संगठनों की ओर से लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की मांग उठाई जा रही थी। FIR खत्म होने से प्रदर्शन में शामिल रहे छात्रों को अपने शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य को लेकर बड़ी राहत मिली है।
गंभीर आपराधिक मामलों को रखा गया अलग
हालांकि, अदालत ने गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़े मामलों को सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत अलग रखने की बात कही है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर राहत के रूप में देखा जा रहा है, न कि हर प्रकार के आपराधिक मामले की सामान्य माफी के रूप में।
छात्रों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है—उनकी आवाज को न्यायिक मंच पर राहत मिली है और प्रदर्शन से जुड़े मामलों का बोझ उनके भविष्य पर नहीं पड़ेगा।

