दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची छात्र आंदोलन का नया केंद्र बनती दिखाई दे रही है। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि आंदोलन को समर्थन देते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
रांची में तेज हुआ छात्र आंदोलन
रांची के कचहरी चौक स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले छात्रों का धरना लगातार जारी है। रविवार को भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आंदोलन में शामिल हुए। शाम के समय प्रदर्शनकारियों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला और हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं। उनकी मांग है कि जिन परीक्षाओं पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उन्हें तत्काल रद्द किया जाए। इसके अलावा TDPL कंपनी और अभय तिवारी से जुड़े परीक्षा मामलों की निष्पक्ष CBI जांच कराई जाए तथा पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
देवेंद्र नाथ महतो ने शुरू की भूख हड़ताल
छात्र आंदोलन के नौवें दिन आंदोलन को समर्थन देते हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना, विवादित परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित JPSC, JSSC और CGL परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
सरकार पर लगाया उदासीनता का आरोप
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। उनके अनुसार इससे अभ्यर्थियों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र हितों को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही है।
अब सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
रांची में बढ़ते छात्र आंदोलन ने राज्य सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या फैसला लिया जाएगा, इस पर अभ्यर्थियों और आम जनता की नजर बनी हुई है।
रांची का यह आंदोलन दिखाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता आज युवाओं के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल है। यदि समय रहते संवाद और समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। वहीं, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया से ही अभ्यर्थियों का विश्वास दोबारा मजबूत किया जा सकता है।
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