दिल्ली में आज सिर्फ संसद का मॉनसून सत्र ही चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि जंतर-मंतर पर होने वाला बड़ा प्रदर्शन भी सुर्खियों में है। एक ओर सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष और प्रदर्शनकारी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटे हैं। राजधानी का माहौल राजनीतिक गतिविधियों और सुरक्षा इंतजामों के बीच पूरी तरह बदल चुका है।
संसद में सरकार की तैयारी, विपक्ष भी आक्रामक
आज से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार कई अहम विधेयकों को पेश करने की तैयारी कर रही है। इनमें शिक्षा, प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक हलचल तेज है।
जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा, संसद मार्च पर रोक
जंतर-मंतर पर सुबह से हजारों प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 10 हजार जवान तैनात किए गए हैं। तीन स्तरीय बैरिकेडिंग, दंगा नियंत्रण वाहन, टियर गैस और अतिरिक्त पुलिस बल की मौजूदगी से पूरे इलाके को हाई सिक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई है और प्रदर्शनकारियों को तय सीमा से आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं चार शर्तें
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कथित विफलताओं की जिम्मेदारी तय करने, प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों को संसद तक जाने देने, सांसदों द्वारा इस मुद्दे को संसद में उठाने का भरोसा देने और आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल में आकर समर्थन देने जैसी मांगें सामने रखी हैं। उन्होंने अपनी निगरानी और आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जाने का भी आरोप लगाया है।
कई मेट्रो स्टेशन बंद, लोगों को सलाह
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ सहित कई मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों से बचने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।
संसद का मॉनसून सत्र लोकतांत्रिक बहस का महत्वपूर्ण मंच है, लेकिन जंतर-मंतर का आंदोलन भी राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार, प्रदर्शनकारी और विपक्ष के बीच संवाद का रास्ता निकलता है या टकराव और बढ़ता है। आने वाले दिन देश की राजनीति और नीति दोनों के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
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