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मध्य महाराष्ट्र के लिए अलग रेलवे मंडल बनाने की मांग तेज

SCoR GM reviews amenities at Markapuram Railway Station

जालना: मराठवाड़ा, विदर्भ और खानदेश के कुछ हिस्सों को मिलाकर मध्य महाराष्ट्र के लिए अलग रेलवे मंडल बनाया जाए, यह मांग मराठवाड़ा रेलवे परिषद में जोरदार तरीके से उठाई गई। जालना रेलवे संघर्ष समिति की ओर से रविवार, 6 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी विद्यालय के सभागार में मराठवाड़ा की रेलवे समस्याओं और क्षेत्र के रेल विकास पर चर्चा के लिए परिषद का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने किया। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटील दानवे, पूर्व नगराध्यक्ष भास्करराव अंबेकर, भाजपा महानगर जिलाध्यक्ष भास्करराव पाटील दानवे, राजाभाऊ देशमुख, नगरसेवक अक्षय गोरंट्याल, अर्जुन गेही, व्यापारी महासंघ के जिलाध्यक्ष विनीत साहनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष कल्याणराव दले, नंदकिशोर जांगडे, रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र देवीदान, महासचिव फिरोज अली मौलाना, उपाध्यक्ष अशोक मिश्रा, सतीश पंच, कोषाध्यक्ष हिरालाल पिपरीये, नितीन चौधरी, इंजीनियर गोपाल भुरेवाल, सूर्यनारायण गजबी, डॉ. राधेश्याम जैस्वाल, एडवोकेट शिवराम सतकर और सतीश बगडिया प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

मराठवाड़ा के साथ भेदभाव का आरोप

रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र देवीदान ने कहा कि रेलवे सुविधाओं के मामले में मराठवाड़ा को लगातार अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के रेल विकास के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटील दानवे को पहल करनी चाहिए।

व्यापारी महासंघ के जिलाध्यक्ष विनीत साहनी ने कहा कि जालना-खामगांव रेल लाइन की मांग आजादी से पहले से चली आ रही है। यह रेल मार्ग शुरू होने से जालना और आसपास के क्षेत्र का उत्तर भारत से व्यापारिक संपर्क मजबूत होगा। इसलिए इस परियोजना को जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

प्राचार्य डॉ. गणेश अग्निहोत्री ने जालना में रेलवे इंजीनियरिंग और अनुसंधान संस्थान शुरू करने की जरूरत बताई। समिति के महासचिव फिरोज अली ने जालना-खामगांव रेल लाइन, रेलवे लाइन के दोहरीकरण और क्षेत्र के रेल विकास के लिए समिति द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने जालना में रेलवे जोनल कार्यालय स्थापित करने की मांग भी रखी।

कार्यक्रम का संचालन आशीष रसाल और सौरभ पंच ने किया। हिरालाल पिपरीये ने आभार माना। इस दौरान अर्जुन गेही, सतीश पंच, गौतम नहाटा, आनंद बोरकर (छत्रपति संभाजीनगर), गणपत सौंदले (परली वैजनाथ), कचरूलाल वर्मा (मानवत) और विनोद ठाकरे (सिंदखेड राजा) ने भी रेलवे विकास को लेकर अपने विचार रखे।

परिषद में अरविंद थोटे, सिकंदर सय्यद, विजय राठी, बंकट खंडेलवाल, मनोज पाचफुले, एडवोकेट महेश धन्नावत, मोहन इंगळे, शिवरतन जांगडे, ममता कायंदे, रमेशचंद्र अग्रवाल, संतोष खंडेलवाल, महेंद्र पित्ती, सुनील बियाणी, डॉ. केदार करवा, अभयकुमार यादव, बालाजी मांडे, पांडुरंग मैंद, पवन जोशी, दिलीप सावजी, शीतलप्रसाद पांडे, विजय व्यास, श्रीनिवास पांगारकर, प्रकाश बोडले, ताज अहमद खान, वेदप्रकाश त्रिपाठी और भगवान ठाकुर सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। छत्रपति संभाजीनगर, सिंदखेड राजा, देऊलगांव राजा, मानवत और परली से भी लोग परिषद में पहुंचे।

जालना में जोनल कार्यालय के लिए केंद्र में प्रयास करेंगे : प्रतापराव जाधव

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि देश के मध्य हिस्से में स्थित जालना में रेलवे का मंडल कार्यालय बनने से शहर का रेल संपर्क और मजबूत होगा। इससे चारों दिशाओं में आने-जाने की सुविधा बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि जालना-खामगांव रेल लाइन के साथ जालना में जोनल कार्यालय शुरू करने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। जाधव ने रेलवे संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समिति लंबे समय से जालना-खामगांव रेल लाइन के लिए आवाज उठा रही है। समिति की ओर से रखी गई मांगों को केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि स्टील और बीज उद्योग के लिए पहचान बना चुका जालना भविष्य में एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन के रूप में विकसित हो सकता है।

जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाएं : रावसाहेब दानवे

पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटील दानवे ने परिषद में पहुंचकर रेलवे से जुड़े मुद्दों पर लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान अंकाई से मुदखेड़ तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण, विद्युतीकरण और नई ट्रेनों के लिए उन्होंने प्रयास किए। रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद अंकाई से छत्रपति संभाजीनगर तक दोहरीकरण का सर्वे कराया गया और करीब 3,000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।

उन्होंने बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए जरूरी विद्युतीकरण के लिए करीब 8,500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। नई ट्रेनों, पीट लाइन तथा जालना और छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के काम भी चल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग के साथ तेज रफ्तार रेल सेवा के लिए सर्वे किया गया था, लेकिन अंतिम डीपीआर को अभी मंजूरी नहीं मिली है। दानवे ने कहा कि अब इन मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाने की जरूरत है। इसके लिए रेलवे संघर्ष समिति को जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री को सौंपा रेलवे मांगों का ज्ञापन

रेलवे संघर्ष समिति की ओर से केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव को मराठवाड़ा की विभिन्न रेलवे मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मध्य महाराष्ट्र के लिए अलग रेलवे मंडल बनाने, छत्रपति संभाजीनगर से नागपुर, बेंगलुरु और अमरावती के लिए नई ट्रेनें शुरू करने तथा जालना रेलवे स्टेशन पर कोच की जानकारी दिखाने वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाने की मांग की गई।

इसके अलावा जालना-छत्रपति संभाजीनगर शटल ट्रेन शुरू करने, बदनापुर और परसोडा में एक्सप्रेस ट्रेनों को ठहराव देने, बंद पड़े दिनेगांव और गेवराई रेलवे स्टेशनों को फिर शुरू करने और शेंद्रा एमआईडीसी में नया रेलवे स्टेशन बनाने की मांग रखी गई।

समिति ने मानवत-परली-पाथरी-सोनपेठ-परली रेल मार्ग को मंजूरी देने, परली-उदगीर मार्ग को नांदेड मंडल में शामिल करने, नांदेड एक्सप्रेस को पहले की तरह पुणे तक चलाने और जालना-नगरसोल डेमू का विस्तार इगतपुरी तक करने की भी मांग की।

इसके साथ ही जालना से गोरखपुर (लखनऊ) एक्सप्रेस और जालना-नाशिक डेमू सेवा शुरू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

जालना की रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़ी पिछली खबरें

जालना-खामगांव रेलमार्ग की मांग को लेकर क्षेत्र में पहले भी आंदोलन और लगातार प्रयास होते रहे हैं। NewsNationOnline की रेलवे खबरें और जालना-खामगांव रेलमार्ग से जुड़ी पिछली खबर भी पढ़ें।

छायाचित्र : गौतम वाघमारे


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Imran Siddiqui

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