NewsNation Online

FireFly In News

जालना में जमीयत-ए-उलेमा का सम्मेलन, आजादी की कुर्बानियों और भाईचारे पर जोर

Large crowd of Muslim men seated on the floor inside a mosque, facing a preacher on a stage with a banner.

आजादी की जंग में हमने पसीने से नहीं, खून से लिखी अपनी कहानी

जालना में जमीयत-ए-उलेमा का स्वतंत्रता दिवस सम्मेलन; मौलाना नदीम सिद्दीकी बोले—देश की आजादी के लिए हमने अपना खून बहाया, मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने सांप्रदायिकता से बचने का दिया संदेश

जालना: स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर्फ झंडा फहराने और देशभक्ति के नारों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उन अनगिनत लोगों की कुर्बानियां और संघर्ष जुड़े हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। इन्हीं कुर्बानियों को याद करते हुए और देश की एकता व सामाजिक भाईचारे का संदेश देने के उद्देश्य से जालना में जमीयत-ए-उलेमा की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक आम सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन में देश की आजादी की लड़ाई के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न समाजों की भूमिका, उलेमा और मुस्लिम समाज के योगदान तथा आज के दौर में सामाजिक एकता और भाईचारे की जरूरत पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

मस्जिद हजरत बिलाल में हुआ स्वतंत्रता दिवस सम्मेलन

जमीयत-ए-उलेमा जालना की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मस्जिद हजरत बिलाल (रजि.), मामा चौक, जालना में आम सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से दोपहर की नमाज तक चला। सम्मेलन की अध्यक्षता जमीयत-ए-उलेमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना नदीम सिद्दीकी ने की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने आजादी की लड़ाई के इतिहास पर चर्चा करते हुए देश के अलग-अलग समाजों की भूमिका पर प्रकाश डाला। खास तौर पर उलेमा और मुस्लिम समाज से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों तथा उनके संघर्षों का उल्लेख किया गया।

जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी संगठन के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अपने दृष्टिकोण की जानकारी उपलब्ध है। जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद की आधिकारिक वेबसाइट पर संगठन की गतिविधियों और इतिहास के बारे में अधिक जानकारी देखी जा सकती है।

‘दारुल उलूम देवबंद का मकसद भी देश की आजादी था’

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुफ्ती सैयद सलमान मंसूरपुरी ने देश की आजादी की लड़ाई के इतिहास पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि दारुल उलूम देवबंद की स्थापना के पीछे दीन की हिफाजत के साथ-साथ देश की आजादी के लिए संघर्ष की भावना भी महत्वपूर्ण रही।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनकी रेशमी रुमाल तहरीक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की चिंता बढ़ाई थी और इसके चलते शेखुल हिंद को जेल भी जाना पड़ा।

मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने कहा कि कठिन परिस्थितियों और जेल की यातनाओं के बावजूद शेखुल हिंद का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने अपनी राजनीतिक समझ और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए देशवासियों को साथ लेकर आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में ऐसे अनेक लोग और संगठन शामिल रहे, जिन्होंने देश के लिए बड़ी कुर्बानियां दीं। स्वतंत्रता आंदोलन के इस इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद समाज के अलग-अलग वर्गों के मुद्दों को सामने रखने और उनके अधिकारों की आवाज बुलंद करने की जरूरत बनी रही।

‘सांप्रदायिकता किसी के लिए फायदेमंद नहीं’

मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने अपने संबोधन में सांप्रदायिकता को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता चाहे किसी भी पक्ष की ओर से हो, उसका नुकसान आखिरकार पूरे समाज और देश को होता है।

उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर लोगों को बांटना किसी के हित में नहीं है। इसी तरह धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली सोच भी समाज में दूरी बढ़ा सकती है। देश की मजबूती और सामाजिक शांति के लिए अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

उन्होंने सामाजिक भाईचारे, आपसी सम्मान और देश की एकता को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि समाज में किसी भी तरह की नफरत और विभाजन की स्थिति पूरे देश के लिए नुकसानदेह होती है।

मौलाना नदीम सिद्दीकी बोले—‘आजादी के लिए हमने खून दिया’

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मौलाना नदीम सिद्दीकी ने जमीयत-ए-उलेमा की ओर से देश और समाज के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “देश की आजादी के लिए हमने दूसरों के पसीने से ज्यादा अपना खून दिया है।”

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी अल्पसंख्यकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर जमीयत-ए-उलेमा लगातार अपनी आवाज उठाती रही है। उनके अनुसार, जब भी अल्पसंख्यकों के हितों से जुड़े मुद्दे सामने आए या उनके अधिकारों को नुकसान पहुंचाने वाली परिस्थितियां बनीं, संगठन ने उन्हें रोकने और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास किए।

मौलाना नदीम सिद्दीकी ने जमीयत के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे समाज और देश की सेवा का काम पूरी लगन और जिम्मेदारी के साथ जारी रखें। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई

सम्मेलन की शुरुआत मुफ्ती अबूबकर द्वारा कुरान की तिलावत से हुई। इसके बाद हाफिज समीर ने नात-ए-रसूल पेश की। हाफिज शाहिद और हाफिज एजाजुद्दीन ने तराना पेश किया, जबकि हमाद इब्ने मुफ्ती अब्दुर्रहमान ने अपनी नज्म प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में मुफ्ती अब्दुर्रज्जाक ने शुरुआती संबोधन किया और सम्मेलन के उद्देश्य तथा कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

जमीयत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने की मेहनत

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जमीयत-ए-उलेमा मराठवाड़ा के महासचिव मुफ्ती अब्दुर्रहमान के मार्गदर्शन में तैयारियां की गईं। वहीं जमीयत-ए-उलेमा जालना के जिलाध्यक्ष मौलाना हसन मिल्ली नदवी और महासचिव मौलाना रईस अहमद मिल्ली की निगरानी में शहर जमीयत, तहसील जमीयत और विभिन्न जोन समितियों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए लगातार मेहनत की।

आयोजकों और कार्यकर्ताओं की ओर से कार्यक्रम में शामिल लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। सम्मेलन के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की कुर्बानियों को याद करने के साथ-साथ देश की एकता, सामाजिक भाईचारे और आपसी सद्भाव का संदेश देने का प्रयास किया गया।

आजादी की कुर्बानियों को याद करने का संदेश

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आजादी केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि लाखों लोगों के संघर्ष और कुर्बानियों का परिणाम है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस को केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय देश की एकता, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश के साथ मनाने की जरूरत है।

सम्मेलन में रखे गए विचारों में विशेष रूप से इस बात पर जोर रहा कि देश की मजबूती के लिए अलग-अलग समुदायों के बीच आपसी विश्वास और भाईचारा जरूरी है। समाज में विभाजन और सांप्रदायिक तनाव से बचते हुए देश की एकता को मजबूत करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

जमीयत-ए-उलेमा के इतिहास से जुड़ी जानकारी

जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संगठन का औपचारिक गठन वर्ष 1919 में हुआ था। संगठन अपनी वेबसाइट पर स्वतंत्रता आंदोलन में उलेमा की भूमिका और अपने ऐतिहासिक सफर से संबंधित सामग्री भी प्रकाशित करता है।

जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद के इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष से संबंधित आधिकारिक जानकारी यहां पढ़ी जा सकती है। महाराष्ट्र इकाई से संबंधित जानकारी के लिए जमीयत-ए-उलेमा महाराष्ट्र का आधिकारिक पेज भी देखा जा सकता है।

NewsNationOnline पर जालना की प्रमुख खबरें

जालना और मराठवाड़ा क्षेत्र की स्थानीय, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और प्रशासनिक खबरों के लिए NewsNationOnline पढ़ते रहें। वेबसाइट पर जालना सहित आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें नियमित रूप से प्रकाशित की जाती हैं।

Large crowd of Muslim men seated on the floor inside a mosque, facing a preacher on a stage with a banner.

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
Imran Siddiqui

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading