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जालना में दर्स-ए-निज़ामी के छात्रों की छमाही परीक्षा, सय्यद जमील मौलाना ने बढ़ाया हौसला

Men in traditional clothing sit on red and green mats, writing at individual desks in a covered open-air hall, likely an exam setting.

दर्स-ए-निज़ामी के छात्रों ने दी छमाही परीक्षा, मुतवल्ली सय्यद जमील मौलाना ने बढ़ाया हौसला

दरगाह सैयद अहमद शेर सवार परिसर में चल रहे दारुल उलूम गुलशन-ए-कादरी अनवार-ए-रज़ा में छह महीने की पढ़ाई पूरी होने के बाद आयोजित हुई छमाही परीक्षा

जालना: पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि मेहनत, अनुशासन, लगन और अच्छे संस्कार भी शिक्षा का अहम हिस्सा हैं। इसी सोच के साथ दरगाह सैयद अहमद शेर सवार परिसर में संचालित दारुल उलूम गुलशन-ए-कादरी अनवार-ए-रज़ा के दर्स-ए-निज़ामी विभाग में छह महीने की पढ़ाई पूरी होने के बाद छमाही परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा में छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और गंभीरता से अपनी उत्तर पुस्तिकाएं लिखीं।

परीक्षा के दौरान छात्र शांत और अनुशासित माहौल में बैठकर प्रश्नों के उत्तर लिखते नजर आए। छात्रों ने परीक्षा की तैयारी को लेकर गंभीरता दिखाई और निर्धारित समय के भीतर अपनी उत्तर पुस्तिकाएं पूरी करने में जुटे रहे। इस दौरान विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और उत्साह भी देखने को मिला।

छह महीने की पढ़ाई के बाद परीक्षा

दारुल उलूम गुलशन-ए-कादरी अनवार-ए-रज़ा के दर्स-ए-निज़ामी विभाग में नियमित रूप से धार्मिक और शैक्षणिक विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। छह महीने की पढ़ाई पूरी होने के बाद आयोजित की जा रही यह छमाही परीक्षा विद्यार्थियों की तैयारी और विषयों की समझ को परखने का महत्वपूर्ण अवसर है।

परीक्षा के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया जाता है कि विद्यार्थियों ने छह महीने के दौरान पढ़ाए गए विषयों को कितनी अच्छी तरह समझा है और वे अपनी जानकारी को प्रश्नों के उत्तर के रूप में कितनी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर पा रहे हैं।

कुरआन से लेकर हदीस और अरबी तक की पढ़ाई

दारुल उलूम के दर्स-ए-निज़ामी विभाग में विद्यार्थियों को कुरआन, हदीस, फिक्ह, अरबी भाषा, तफसीर और इस्लामी शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जाती है। इन विषयों के अध्ययन के साथ विद्यार्थियों में धार्मिक ज्ञान, भाषा की समझ और अध्ययन की आदत विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाता है।

छमाही परीक्षा में विद्यार्थियों से पढ़ाए गए विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे जा रहे हैं। परीक्षा छात्रों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन करने के साथ-साथ शिक्षकों को भी यह समझने में मदद करती है कि किन विषयों में विद्यार्थियों की तैयारी बेहतर है और किन क्षेत्रों में उन्हें आगे और मेहनत की जरूरत है।

परीक्षा के दौरान दिखा छात्रों में उत्साह

परीक्षा केंद्र पर छात्र निर्धारित समय से पहले पहुंचकर अपनी तैयारी में जुटे नजर आए। परीक्षा शुरू होने के बाद विद्यार्थियों ने शांत वातावरण में प्रश्नपत्र हल किए। छात्रों ने सवालों को ध्यानपूर्वक पढ़ते हुए अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में जवाब लिखे।

परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों में किसी तरह की जल्दबाजी के बजाय गंभीरता और एकाग्रता दिखाई दी। छात्रों ने निर्धारित समय के भीतर अधिक से अधिक प्रश्नों के उत्तर पूरे करने का प्रयास किया।

सय्यद जमील मौलाना ने छात्रों का बढ़ाया हौसला

इस अवसर पर दरगाह के मुतवल्ली सय्यद जमील मौलाना ने परीक्षा में शामिल छात्रों से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ पढ़ाई करने की अपील की।

सय्यद जमील मौलाना ने कहा कि शिक्षा इंसान की जिंदगी को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे अखलाक, अनुशासन और अच्छे व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार इंसान के व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने परीक्षा में शामिल सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जो विद्यार्थी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करता है, उसे अपनी मेहनत का फल जरूर मिलता है। उन्होंने छात्रों से आगे भी इसी तरह मेहनत जारी रखने और अपने माता-पिता तथा शिक्षकों का नाम रोशन करने की अपील की।

शिक्षकों और जिम्मेदारों ने की विशेष मेहनत

छमाही परीक्षाओं को सफल बनाने के लिए हजरत मौलाना नौशाद रज़ा कादरी अलीमी, हजरत मौलाना अरमान अलीमी, हजरत मौलाना तौफीक मिस्बाही, हजरत मौलाना फैज मिस्बाही और हजरत मौलाना नसीर अमजदी सहित अन्य जिम्मेदारों ने विशेष मेहनत की।

परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के लिए शांत और अनुशासित वातावरण बनाए रखने के साथ परीक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में शिक्षकों और जिम्मेदारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार पर जोर

दारुल उलूम में आयोजित इस छमाही परीक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के किताबी ज्ञान को परखना नहीं है, बल्कि उनकी अध्ययन क्षमता, विषयों की समझ और नियमित पढ़ाई के प्रति गंभीरता का आकलन करना भी है। परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कमियों को समझने और आगे बेहतर तैयारी करने का अवसर मिलता है।

इस अवसर पर छात्रों को यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान को जीवन में उतारना और समाज के लिए उपयोगी इंसान बनना भी है।

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Group of men in traditional clothing sitting on green and red mats, taking written exams at individual desks under a covered open-air area.
Group of men sitting on red and green mats under a metal roof, writing at small desks in a covered outdoor hall.
Group of men in traditional clothing seated on red and green mats, writing at small desks in an open-air hall
Group of men in traditional caps seated on red and green carpets, writing at desks in an outdoor courtyard classroom.
Men in traditional clothing sit on red and green mats, writing at individual desks in a covered open-air hall, likely an exam setting.

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Imran Siddiqui

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