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10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के 81 वर्षीय दोषी को 20 साल की जेल, ₹3 लाख मुआवजा

Jalna Court POCSO Verdict 2026

जालना विशेष न्यायालय का बड़ा फैसला:

जालना, 22 जून 2026: महाराष्ट्र के जालना जिले से कानून और व्यवस्था को मजबूत करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ की एक विशेष अदालत ने बाल यौन उत्पीड़न के एक अत्यंत संवेदनशील और जघन्य मामले में त्वरित न्याय (Fast-Track Justice) की मिसाल पेश की है। माननीय विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृपेश विजय मोरे ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची पर गंभीर यौन हमला (दुष्कर्म) करने के जुर्म में 81 वर्षीय वृद्ध आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम (कठोर) कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने आरोपी की ढलती उम्र को दरकिनार करते हुए अपराध की गंभीरता के आधार पर यह कड़ा फैसला सुनाया।

दोषी पर लगा भारी जुर्माना, पीड़िता को मिलेगा आर्थिक मुआवजा

विशेष न्यायालय ने दोषी बिसन उर्फ भिसन रायसिंग ढवले (निवासी- सावरगांव, तहसील- जाफ्राबाद, जिला- जालना) पर ₹50,000 का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को चुकाने में विफल रहता है, तो उसे छह महीने की अतिरिक्त सश्रम कैद भुगतनी होगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जुर्माने की यह पूरी राशि पीड़ित बच्ची को क्षतिपूर्ति के रूप में सौंपी जाए।

इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और मानसिक संबल के लिए महाराष्ट्र सरकार (External Link) को आदेश दिया है कि वह पीड़ित बच्ची को ₹3,00,000 (तीन लाख रुपये) की मुआवजा राशि तत्काल प्रदान करे।

रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना: क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष (Prosecution) द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, यह बर्बर घटना 14 सितंबर 2025 की है। दोपहर करीब 02:00 बजे 10 साल की पीड़िता अपने गांव के महादेव मंदिर के पास खेल रही थी। इसी दौरान रास्ते में खड़े आरोपी बिसन ढवले ने उसे बहला-फुसलाकर आवाज दी और उसका हाथ पकड़कर जबरन अपने घर के भीतर खींच ले गया।

बच्ची के लगातार विरोध करने और रोने-चिल्लाने के बावजूद आरोपी ने अंदर से दरवाजे की कुंडी लगा ली। इसके बाद आरोपी ने जबरन मासूम के कपड़े उतारे और उस पर गंभीर यौन हमला (बलात्कार) किया। शारीरिक पीड़ा के कारण जब बच्ची जोर-जोर से चिल्लाई, तो उसकी आवाज सुनकर आस-पास के तीन पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे।

पड़ोसियों की सतर्कता से बची मासूम की जान

पड़ोसियों ने जब आरोपी के घर का दरवाजा खटखटाया, तो घबराकर आरोपी ने दरवाजा खोला। पड़ोस में रहने वाले ‘राजू’ नामक युवक ने तुरंत पीड़िता को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया और उसे सुरक्षित घर भेजा। शाम को जब पीड़िता की मां काम से वापस लौटी, तो बच्ची ने अपनी मां और दादी को रोते हुए पूरी आपबीती बताई। इसके बाद परिजन तुरंत पीड़िता को लेकर टेंभुर्णी पुलिस थाने पहुंचे।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पुख्ता चार्जशीट

टेंभुर्णी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना समय गंवाए कार्रवाई की। महिला सहायक पुलिस निरीक्षक (API) आरती जाधव ने तुरंत पीड़िता का आधिकारिक बयान दर्ज किया। इसके बाद थाना प्रभारी अधिकारी बी. एस. खार्डे ने आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित कानूनी धाराओं के तहत अपराध संख्या 170/2025 पंजीकृत किया:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023: धारा 65 (2) (नाबालिग से दुष्कर्म के खिलाफ सख्त धारा)
  • पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) 2012: धारा 4, 6, 8, 10 और 12 (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण)

मुख्य जांच अधिकारी के. बी. भारती ने मामले की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच पूरी कर बेहद कम समय में अदालत के समक्ष पुख्ता आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। इसी तरह के अन्य कानूनी मामलों और फैसलों की जानकारी के लिए आप हमारे क्राइम न्यूज़ सेक्शन (Internal Link) पर जा सकते हैं।

फास्ट-ट्रैक मोड में सुनवाई: मात्र 3 तारीखों में दर्ज हुए गवाह

इस मामले की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि विशेष अदालत ने बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए केस को ‘फास्ट-ट्रैक’ मोड पर चलाया। मुकदमा शुरू होने के बाद मात्र तीन अदालती सुनवाइयों (Dates) के भीतर सभी मुख्य और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कर लिए गए।

अभियोजन पक्ष ने आरोपी को कड़ी सजा दिलाने के लिए अदालत में कुल 10 गवाह पेश किए। इनमें निम्नलिखित गवाहों के बयान सबसे अकाट्य साबित हुए:

  1. पीड़ित बच्ची और उसकी दादी के बयान।
  2. स्वतंत्र पंच गवाह बिलकिस शेख अब्दुल रहीम।
  3. चिकित्सा अधिकारी डॉ. भाग्यश्री काशिद, डॉ. विट्ठल देशमुख और डॉ. अजहरूद्दीन की मेडिकल रिपोर्ट।
  4. स्कूल के प्रधानाध्यापक गोविंद जाधव द्वारा प्रस्तुत आयु प्रमाण पत्र (जिसने साबित किया कि पीड़िता नाबालिग है)।

पुलिस प्रशासन और सरकारी वकील की सराहना

अदालत में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) वर्षा लक्ष्मीकांत मुकीम ने अत्यंत प्रभावी और मजबूत पैरवी की।

इस जघन्य मामले के दोषी को रिकॉर्ड समय में सलाखों के पीछे भेजने और पीड़िता को न्याय दिलाने में जालना के पुलिस अधीक्षक (SP), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Addl. SP) और अनुमंडलीय पुलिस अधिकारी (SDPO) भोकरदन के कुशल मार्गदर्शन में टेंभुर्णी पुलिस टीम और कोर्ट पैरवी दल (Court Liaison Team) ने अत्यंत सराहनीय और सक्रिय भूमिका निभाई है।

महाराष्ट्र में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी अन्य प्रशासनिक खबरों को विस्तार से पढ़ने के लिए हमारी महाराष्ट्र राज्य समाचार (Internal Link) कैटेगरी को विजिट करें।

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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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