जालना में ‘मैं महात्मा फुले बोल रहा हूँ’ नाटक से जागी सामाजिक चेतना, सादगी से मनाई गई जयंती
📍 जालना | दिनांक: 11 अप्रैल 2026
जालना शहर में महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती के अवसर पर एक अनूठा और प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने सामाजिक जागरूकता और वैचारिक क्रांति का संदेश दिया। नूतन वसाहत स्थित क्रांतिगुरु लहुजी सालवे चौक पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध एकल नाटक “मैं महात्मा फुले बोल रहा हूँ” का मंचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद द्वारा दीपक वैद्य के नेतृत्व में किया गया।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि जयंती को बिना किसी डीजे, नाच-गाने या भव्य दिखावे के, पूरी तरह विचारों और सामाजिक प्रबोधन के माध्यम से मनाया गया। यही कारण है कि यह कार्यक्रम शहर में चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने इसे सकारात्मक पहल के रूप में सराहा।
📚 नाटक के माध्यम से महात्मा फुले के विचारों का जीवंत प्रस्तुतीकरण
प्रोफेसर कुमार आहेर ने अपने प्रभावशाली अभिनय के जरिए महात्मा फुले के जीवन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने उनके बचपन से लेकर सत्यशोधक समाज की स्थापना तक के संघर्ष को विस्तार से दिखाया।
नाटक में विशेष रूप से:
- उस दौर की सामाजिक असमानता
- महिलाओं की शिक्षा के लिए फुले का योगदान
- किसानों की समस्याओं पर उनकी चिंता
- छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ उनका आंदोलन
को बेहद प्रभावी तरीके से दर्शाया गया।
प्रस्तुति के दौरान महात्मा फुले के प्रसिद्ध विचार “विद्येविना मती गेली…” को भी रेखांकित किया गया, जिससे शिक्षा के महत्व पर जोर दिया गया।
👥 मान्यवरों की मौजूदगी, आयोजकों की सराहना
कार्यक्रम में पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल ने अध्यक्षता की, जबकि जालना महानगरपालिका की महापौर वंदना मगरे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। नगरसेवक संदीप खरात की भी विशेष उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि:
“आज के समय में डीजे और मनोरंजन की बजाय महात्मा फुले के विचारों को समाज तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
उन्होंने अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद और आयोजकों की इस पहल के लिए सराहना की।
🙌 नागरिकों की बड़ी भागीदारी, जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष नागरिकों ने भाग लिया। समता परिषद के जिला अध्यक्ष मधुकर झरेकर, शहर अध्यक्ष दीपक वैद्य सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और महात्मा फुले के विचारों को घर-घर तक पहुंचाना था, जिसमें आयोजक सफल रहे।
🎤 संचालन और आयोजन
कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण घनवट ने किया। पूरे आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न किया गया, जिससे उपस्थित लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
📢 संदेश: विचारों से ही संभव है सामाजिक परिवर्तन
यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि सादगी और वैचारिक दृष्टिकोण के माध्यम से भी समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। जालना में प्रस्तुत यह एकल नाटक वास्तव में “वैचारिक क्रांति का दर्शन” कराने वाला साबित हुआ।
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👉 महात्मा ज्योतिराव फुले के बारे में जानकारी: https://en.wikipedia.org/wiki/Jyotirao_Phule
👉 सामाजिक सुधार आंदोलनों की जानकारी: https://ncert.nic.in


मैं महात्मा फुले बोल रहा हूँ
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