जालना में “नाइट बंदी” आदेश पर घमासान, पुलिस प्रशासन पर व्यापारियों को परेशान करने का आरोप
एडवोकेट महेश धन्नावत ने पुलिस आदेश को बताया “तानाशाही फैसला”, कहा — कानून-व्यवस्था की विफलता छिपाने के लिए नागरिकों पर थोपा जा रहा दबाव
Jalna : जालना शहर में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन समय को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और नागरिकों के बीच इस आदेश को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
एडवोकेट Mahesh Dhannawat ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने के बाद अब प्रशासन अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर व्यापारियों और आम नागरिकों पर अनावश्यक प्रतिबंध थोप रहा है।
उन्होंने जालना पुलिस अधीक्षक Tegbir Singh Sandhu द्वारा मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 33 (W) के तहत जारी किए गए आदेश को पूरी तरह अवैध, राज्य सरकार की नीति के खिलाफ और उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन बताया है।
“2017 के कानून के तहत 24 घंटे दुकानें खुली रखने की अनुमति”
एडवोकेट महेश धन्नावत ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि महाराष्ट्र दुकाने एवं स्थापना (रोजगार और सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम 2017 के तहत राज्य में शराब विक्रय केंद्रों को छोड़कर अन्य सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24 घंटे खुले रखने की अनुमति है।
उन्होंने बताया कि उद्योग, ऊर्जा एवं श्रम विभाग ने 1 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। यह परिपत्र सभी स्थानीय प्रशासनिक विभागों और पुलिस विभागों को भेजा गया था। इसकी प्रति पुलिस महानिदेशक कार्यालय को भी उपलब्ध कराई गई थी।
धन्नावत ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद जालना पुलिस प्रशासन द्वारा जारी आदेश “अपराधियों को छोड़कर ईमानदार व्यापारियों को परेशान करने” जैसा कदम है।
हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला
एडवोकेट धन्नावत ने कहा कि मुंबई उच्च न्यायालय ने “Accelerate Products Ventures Pvt. Ltd. बनाम महाराष्ट्र राज्य” मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि 2017 के कानून के तहत दुकानों को 24 घंटे संचालित करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालन समय पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है। पुलिस का दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि अपनी अक्षमता छिपाने के लिए वैध व्यवसायों को निशाना बनाना।
धन्नावत ने यह भी कहा कि पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश न केवल अवैध है, बल्कि इसे उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के रूप में भी देखा जा सकता है।
“सुरक्षा नहीं दे सकते तो सरकार को लिखें पत्र”
अपने बयान में एडवोकेट धन्नावत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक शहर के नागरिकों और व्यापारियों को सुरक्षा देने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें सरकार को पत्र लिखकर अपनी असमर्थता स्वीकार करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में बढ़ते अपराधों पर नियंत्रण करने के बजाय देर रात तक काम करने वाले मजदूरों, रात्रि पाली में नौकरी कर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और छोटे होटल-कैफे संचालकों को परेशान किया जा रहा है।
व्यापारियों और विद्यार्थियों पर असर की आशंका
धन्नावत ने कहा कि इस आदेश का सबसे अधिक असर छोटे व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा। रात में काम कर अपनी शिक्षा पूरी करने वाले विद्यार्थियों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी और नागरिक आंदोलन करने के साथ-साथ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
शहर में बढ़ रहा विरोध
इस मामले में अभी तक पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, शहर के व्यापारिक संगठनों और नागरिकों के बीच इस आदेश को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन के इस फैसले से कानून-व्यवस्था की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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जालना दुकान समय प्रतिबंध विवाद

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