भीम पार्क को लेकर जालना की राजनीति गरमाई: खोतकर बनाम गोरंट्याल आमने-सामने, मोती तालाब परियोजना पर आरोप-प्रत्यारोप तेज
मोती तालाब की जमीन, एनओसी, तकनीकी मंजूरियों और 130 करोड़ की स्वीकृति के दावों पर छिड़ी सियासी जंग; मुख्यमंत्री से मुलाकात कर परियोजना को गति देने की घोषणा
जालना में प्रस्तावित भीम पार्क (विपश्यना केंद्र) परियोजना को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बहाने अब सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विधायक अर्जुन खोतकर द्वारा जालना महानगरपालिका पर लगाए गए आरोपों के बाद पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने रविवार को आयोजित विस्तृत पत्रकार परिषद में पलटवार करते हुए पूरे मामले की प्रशासनिक, कानूनी और तकनीकी स्थिति सार्वजनिक की।
गोरंट्याल ने कहा कि भीम पार्क जैसी बड़ी परियोजना केवल राजनीतिक घोषणाओं या भाषणों से नहीं बन सकती। इसके लिए भूमि हस्तांतरण, प्रशासनिक मंजूरियां, तकनीकी अध्ययन और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करना अनिवार्य है।
क्या है पूरा विवाद?
रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में विधायक अर्जुन खोतकर ने आरोप लगाया था कि जालना महानगरपालिका पर नियंत्रण रखने वाले लोगों ने जानबूझकर भीम पार्क निर्माण का प्रस्ताव महानगरपालिका के एजेंडे में शामिल नहीं किया।
उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए 130 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद काम को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इसे जनभावनाओं के साथ अन्याय बताते हुए महानगरपालिका के सत्ताधारियों पर निशाना साधा।
पत्रकार परिषद में वायरल वीडियो दिखाकर दिया जवाब
इन आरोपों के जवाब में पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने पत्रकार परिषद आयोजित कर विधायक अर्जुन खोतकर का वायरल वीडियो मीडिया के सामने चलाया।
उन्होंने कहा कि वीडियो में किए गए दावे वास्तविक प्रशासनिक स्थिति से मेल नहीं खाते और राजनीतिक उद्देश्य से जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला अधिकारी का पत्र दिखाकर रखे तथ्य
पत्रकारों को संबोधित करते हुए गोरंट्याल ने 17 जून को जिला अधिकारी द्वारा महानगरपालिका आयुक्त को भेजे गए आधिकारिक पत्र की प्रति भी दिखाई।
उन्होंने बताया कि पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मोती तालाब की भूमि महानगरपालिका के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि भीम पार्क परियोजना आगे बढ़ सके।
गोरंट्याल के अनुसार फिलहाल मोती तालाब की जमीन महानगरपालिका की स्वामित्व वाली भूमि नहीं है। जब तक भूमि का विधिवत हस्तांतरण नहीं होता, तब तक किसी भी निर्माण कार्य की शुरुआत कानूनी रूप से संभव नहीं है।
पहले भूमि हस्तांतरण, फिर एनओसी और तकनीकी अध्ययन
पूर्व विधायक ने परियोजना की प्रक्रिया विस्तार से बताते हुए कहा कि भूमि हस्तांतरण के बाद जिला प्रशासन से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करना होगा।
इसके बाद परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी (व्यवहार्यता परीक्षण) कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि महानगरपालिका के पास इस प्रकार का तकनीकी अध्ययन करने की व्यवस्था नहीं है, इसलिए किसी विशेषज्ञ एजेंसी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार होने के बाद पर्यावरण विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजना आगे बढ़ सकती है।
130 करोड़ रुपये मंजूर होने के दावे पर उठाए सवाल
गोरंट्याल ने विधायक खोतकर के 130 करोड़ रुपये मंजूर होने के दावे पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि किसी योजना पर प्रारंभिक चर्चा होना, बैठक में सहमति बनना और वास्तविक वित्तीय स्वीकृति मिलना—तीनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
उनका कहना था कि भूमि हस्तांतरण, तकनीकी रिपोर्ट, पर्यावरणीय मंजूरी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी हुए बिना किसी परियोजना को अंतिम वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकती।
विसर्जन कुंड निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप
पत्रकार परिषद के दौरान गोरंट्याल ने मोती तालाब पर बने विसर्जन कुंड का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग दो करोड़ रुपये लागत वाले निर्माण कार्य पर 19 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए।
उन्होंने तत्कालीन महानगरपालिका आयुक्त संतोष खांडेकर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और आज तक इस परियोजना को पर्यावरण विभाग की मंजूरी भी प्राप्त नहीं हुई है।
“महाराष्ट्र का सबसे भव्य भीम पार्क बने”
गोरंट्याल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक पार्क बनाना नहीं, बल्कि ऐसा आधुनिक और भव्य भीम पार्क तैयार करना है जो पूरे महाराष्ट्र में आकर्षण का केंद्र बने।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना को साकार करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे, विधायक बबनराव लोणीकर, विधायक नारायण कुचे, भास्कर दानवे सहित कई जनप्रतिनिधि प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात
पूर्व विधायक ने घोषणा की कि अगले दो दिनों में वे राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
उन्होंने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल में जालना के दलित समाज के प्रमुख नेता और प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, ताकि परियोजना को शीघ्र प्रशासनिक मंजूरी और गति मिल सके।
अंडरग्राउंड ड्रेनेज योजना पर भी साधा निशाना
गोरंट्याल ने विधायक अर्जुन खोतकर के मंत्री कार्यकाल में शुरू हुई अंडरग्राउंड ड्रेनेज योजना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का उद्घाटन तो जल्दबाजी में कर दिया गया, लेकिन वर्षों बाद भी यह पूरी नहीं हो सकी। उनके अनुसार विकास योजनाओं को केवल घोषित करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि तकनीकी तैयारी, प्रशासनिक समन्वय और योजनाबद्ध क्रियान्वयन भी आवश्यक होता है।
“राजनीति नहीं, स्थायी विकास चाहिए”
पत्रकार परिषद के अंत में गोरंट्याल ने कहा कि भीम पार्क किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे जालना और समाज की परियोजना है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी कानूनी, तकनीकी और पर्यावरणीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह परियोजना निश्चित रूप से साकार होगी और जालना को एक नई पहचान मिलेगी।
राजनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनज़र भीम पार्क परियोजना अब राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। एक ओर विधायक अर्जुन खोतकर परियोजना में देरी के लिए महानगरपालिका को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल का कहना है कि कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात और प्रशासनिक स्तर पर होने वाले फैसले इस परियोजना की दिशा तय कर सकते हैं।
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