*मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने कथित विवादित टिप्पणी पर जताई नाराजगी, मुसलमानों से सब्र और कानून का रास्ता अपनाने की अपील.
जालना: शहर की गुलजार मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले माहौल उस समय भावुक हो गया, जब मस्जिद के इमाम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने अपने बयान में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका (रजि.) की शान और उनके सम्मान पर दिल से बात रखी. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मोहब्बत सिर्फ एक जज़्बा नहीं, बल्कि ईमान की बुनियाद है.
मौलाना ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस्लाम, पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा (रज़ि.) या इस्लाम की दूसरी मुकद्दस हस्तियों के बारे में अपमानजनक बातें करता है, तो उससे करोड़ों मुसलमानों के दिल दुखते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी बातें समाज में नफरत फैलाने का कारण बनती हैं और किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं.
अपने संबोधन में मौलाना ने नाजिया इलाही खान से जुड़े उस कथित वायरल वीडियो का भी जिक्र किया, जिसे लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, शिकायतें और कानूनी कार्रवाई की मांग उठी है. उन्होंने कहा इस मामले में भारत सरकार को कठोर कदम उठाते हुए नागरिकों की मजहबी भावनाओं को ठेस पहुंचाकर मुल्क में अमन और शांति को खतरा पैदा करने वाली नाजिया इलाही खान को कडी से कडी सजा दी जाए.
मौलाना ने कहा, “कुछ लोग सुर्खियां बटोरने या पहचान बनाने के लिए ऐसी बातें करते हैं, लेकिन इससे हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शान में रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ सकता। अल्लाह तआला ने अपने हबीब सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सबसे बुलंद मुकाम अता फरमाया है और दुनिया की कोई ताकत उस मुकाम को कम नहीं कर सकती.”
उन्होंने सहीह बुखारी की मशहूर हदीस सुनाते हुए कहा, “तुममे से कोई उस वक्त तक पूरा मोमिन नहीं हो सकता, जब तक मैं उसे उसके मां-बाप, उसकी औलाद और दुनिया के तमाम लोगों से ज्यादा प्यारा न हो जाऊं.” मौलाना ने कहा कि यही वजह है कि हर मुसलमान अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सबसे ज्यादा मोहब्बत करता है और उनकी इज्जत और अदब को अपने ईमान का हिस्सा मानता है.
उन्होंने कहा कि सहाबा-ए-किराम ने अपने अमल से दुनिया को दिखा दिया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सच्ची मोहब्बत कैसी होती है. यहां तक कि उस दौर के विरोधी भी सहाबा की वफादारी, कुर्बानी और अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लिए उनके बेपनाह प्यार की मिसाल दिया करते थे.
मौलाना ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अपनी बात कहने का अधिकार देता है, लेकिन किसी भी धर्म, उसके पैगंबर, धार्मिक ग्रंथ या पूजनीय हस्तियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना समाज में तनाव और कटुता पैदा करता है. इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह दूसरे धर्मों और उनकी आस्थाओं का अपमान न करें.
उन्होंने मुस्लिम समाज से खास तौर पर अपील करते हुए कहा कि लोग किसी भी हाल में कानून अपने हाथ में न लें. उन्होंने कहा, “हमारा रास्ता सब्र का है, अमन का है और कानून का है। अगर किसी ने गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा. हमें अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मोहब्बत का सबूत उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर देना है.”
अपने संबोधन के आखिर में मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सच्ची मोहब्बत का मतलब सिर्फ जज़्बाती नारे लगाना नहीं है, बल्कि उनकी सीरत, उनकी सुन्नत, उनके अखलाक, उनकी रहमत और इंसानियत के पैगाम को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाना है. उन्होंने सभी लोगों से शांति, भाईचारा और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यही इस्लाम का असली संदेश है और यही समाज में अमन और एकता का सबसे मजबूत रास्ता है.
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