‘मुर्दों की नगरी’ से राष्ट्रीय साहित्य जगत में दस्तक देंगे डॉ. निलेश पगारे, तीन शहरों में होगा भव्य लोकार्पण
जालना | प्रतिनिधि
अपनी प्रभावशाली लेखनी, सामाजिक सरोकारों और संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के लिए पहचाने जाने वाले युवा साहित्यकार डॉ. निलेश किशोरराव पगारे की बहुप्रतीक्षित हिंदी पुस्तक ‘मुर्दों की नगरी’ का लोकार्पण आगामी दिनों में देश के तीन प्रमुख शहरों में किया जाएगा। पुस्तक के रहस्यमयी शीर्षक और विषय-वस्तु को लेकर साहित्य जगत में पहले से ही व्यापक चर्चा और उत्सुकता का माहौल है।
डॉ. पगारे की यह नई कृति न केवल साहित्य प्रेमियों, बल्कि शोधार्थियों और समकालीन हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई है। पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा के साथ ही देशभर के साहित्यिक मंचों पर इसकी चर्चा तेज हो गई है।
हरियाणा, नई दिल्ली और पुणे में होंगे लोकार्पण समारोह
लेखक की नई पुस्तक ‘मुर्दों की नगरी’ का पहला लोकार्पण समारोह 15 जुलाई को पलवल (हरियाणा) में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 20 जुलाई को नई दिल्ली तथा 22 जुलाई को पुणे (महाराष्ट्र) में पुस्तक का औपचारिक विमोचन होगा।
लगातार तीन प्रमुख शहरों में आयोजित हो रहे लोकार्पण समारोहों को साहित्यिक जगत में डॉ. निलेश पगारे की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान और लोकप्रियता का प्रमाण माना जा रहा है।
लगभग 30 अध्यायों में समकालीन विषयों की झलक
पुस्तक लगभग 30 अध्यायों में विभाजित है। हालांकि लेखक और प्रकाशक की ओर से अभी इसकी विषय-वस्तु को सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही कारण है कि पाठकों और साहित्य समीक्षकों के बीच यह जानने की उत्सुकता बनी हुई है कि पुस्तक किन सामाजिक, मानवीय, वैचारिक अथवा समकालीन विषयों को केंद्र में रखकर लिखी गई है।
पुस्तक का आकर्षक आवरण और ‘मुर्दों की नगरी’ जैसा विचारोत्तेजक शीर्षक पहले ही साहित्यिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।
शिक्षा मंत्रालय की आईएसबीएन एजेंसी से मिला आधिकारिक पंजीकरण
डॉ. निलेश पगारे की इस पुस्तक को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत राजा राममोहन राय राष्ट्रीय आईएसबीएन एजेंसी (Raja Rammohun Roy National Agency for ISBN) द्वारा आधिकारिक ISBN प्रदान किया गया है।
- ISBN: 978-93-78880-152-5
- प्रकाशक संदर्भ क्रमांक: 1946
आधिकारिक आईएसबीएन मिलने के बाद यह पुस्तक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में संदर्भ ग्रंथ के रूप में भी सूचीबद्ध की जा सकेगी।
संघर्ष से साहित्य तक का प्रेरक सफर
साधारण परिवार से आने वाले डॉ. निलेश किशोरराव पगारे ने अपने परिश्रम, अध्ययन और लेखन क्षमता के बल पर साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहना मिल चुकी है।
उनकी लेखनी सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती है। यही कारण है कि उनकी नई पुस्तक को लेकर साहित्य प्रेमियों की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं।
साहित्य प्रेमियों को बड़ी उम्मीद
साहित्य समीक्षकों का मानना है कि यदि पुस्तक का कथ्य शीर्षक जितना प्रभावशाली हुआ, तो ‘मुर्दों की नगरी’ समकालीन हिंदी साहित्य की चर्चित कृतियों में अपना स्थान बना सकती है।
तीन राज्यों में आयोजित होने वाले लोकार्पण समारोह इस बात का संकेत हैं कि पुस्तक केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने की क्षमता रखती है।
साहित्य जगत में बढ़ी उत्सुकता
पुस्तक के प्रकाशन और लोकार्पण कार्यक्रमों को लेकर साहित्यकारों, पाठकों और शोधार्थियों में उत्साह का वातावरण है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुस्तक अपने कथ्य, प्रस्तुति और वैचारिक गहराई से पाठकों पर किस प्रकार की छाप छोड़ती है।
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उपयोगी लिंक
- राजा राममोहन राय राष्ट्रीय आईएसबीएन एजेंसी (ISBN India): https://isbn.gov.in/
- शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार: https://www.education.gov.in/
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