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दोपहर की झपकी फायदेमंद या बीमारी का संकेत? जानिए कब हो जाएं सतर्क

दोपहर की झपकी फायदेमंद या बीमारी का संकेत? जानिए कब हो जाएं सतर्क

दोपहर के भोजन के बाद हल्की सुस्ती या कुछ मिनट की झपकी लेने की इच्छा होना आम बात है। कई लोगों के लिए 10–20 मिनट की छोटी नींद उन्हें दोबारा ऊर्जावान और अधिक एकाग्र बना देती है। लेकिन यदि आपको हर दिन लंबी झपकी की जरूरत महसूस होती है या पूरी रात सोने के बाद भी लगातार थकान बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह शरीर में छिपी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

कितनी देर की झपकी होती है फायदेमंद?

मेदांता नोएडा के श्वसन एवं नींद चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. मृणाल सिरकार के अनुसार, 10 से 30 मिनट की छोटी झपकी सबसे अधिक लाभकारी मानी जाती है। यह मानसिक थकान कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और शरीर को तरोताजा महसूस कराने में मदद करती है, खासकर तब जब पिछली रात पर्याप्त नींद न मिली हो या मानसिक कार्य अधिक किया गया हो।

कब बढ़ जाती है चिंता की बात?

यदि आपको रोजाना लंबी झपकी लेनी पड़ती है, दिनभर उनींदापन बना रहता है या पर्याप्त नींद के बावजूद सुबह उठते समय भी थकान महसूस होती है, तो यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार दिन में नींद आना कई बार किसी बीमारी का लक्षण हो सकता है, इसलिए ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

बार-बार नींद आने के पीछे कई स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय सांस बार-बार रुकती है, जिससे रात की नींद पूरी नहीं हो पाती और दिन में अत्यधिक नींद आती है। अनिद्रा (इंसोम्निया) से पीड़ित लोगों की नींद बार-बार टूटती है या पर्याप्त नहीं हो पाती, जिससे दिनभर थकान बनी रहती है। वहीं रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी स्थिति में रात के समय पैरों में बेचैनी के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

थायरॉयड, डायबिटीज और तनाव भी हो सकते हैं वजह

विशेषज्ञ बताते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म, डायबिटीज, हृदय रोग, कुछ तंत्रिका संबंधी विकार और अन्य पुरानी बीमारियां भी लगातार थकान और दिन में नींद आने का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा डिप्रेशन, चिंता (एंग्जायटी) और लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस कर सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

यदि दिन में अत्यधिक नींद आना आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों, कामकाज या वाहन चलाने जैसी जिम्मेदारियों को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। समय पर जांच और सही इलाज से कई गंभीर समस्याओं का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है।

दोपहर की छोटी झपकी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन रोजाना अत्यधिक नींद आना या लगातार थकान महसूस होना सामान्य नहीं माना जाता। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे केवल आलस्य समझकर नजरअंदाज न करें। सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना आपके बेहतर स्वास्थ्य और जीवनशैली के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


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