आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और ऑफिस का काम निपटाना आम बात हो गई है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार कम नींद लेना केवल थकान ही नहीं, बल्कि मिनी स्ट्रोक (Transient Ischemic Attack – TIA) जैसी गंभीर समस्या का जोखिम भी बढ़ा सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स का कहना है कि युवाओं में यह आदत भविष्य में स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थिति का कारण बन सकती है।
क्या होता है मिनी स्ट्रोक?
मिनी स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) तब होता है, जब कुछ समय के लिए मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह रुक जाता है। इसके लक्षण कुछ मिनटों या घंटों में ठीक हो सकते हैं, लेकिन इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को मिनी स्ट्रोक होता है, उनमें आगे चलकर स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है, और कई मामलों में यह जोखिम पहले एक वर्ष के भीतर ही सामने आ सकता है।
कम नींद कैसे बढ़ाती है खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार कम नींद लेने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय रहते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, शरीर में सूजन बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। ये सभी कारक मिलकर स्ट्रोक और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाते हैं। अच्छी और पर्याप्त नींद रक्त वाहिकाओं की मरम्मत, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और शरीर की रिकवरी के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।
इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
मिनी स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों में शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में कठिनाई, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना और कुछ समय तक भ्रम की स्थिति शामिल हो सकती है। यदि ऐसे कोई भी संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना 7–8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लें, देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत कम करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, ताकि स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।
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